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Wednesday, June 17, 2026

जल जमाव से जनता और व्यापारी त्रस्त, नगर निगम के अधिकारी मस्त: झारखण्ड चैम्बर ने जताई कड़ी नाराजगी

रांची । राजधानी रांची में थोड़ी सी बारिश होते ही सड़कों का तालाब में तब्दील होना और जल जमाव की समस्या का स्थायी समाधान न निकल पाना अब एक बड़ा मुद्दा बन गया है। इस जटिल होती समस्या को लेकर झारखण्ड चैम्बर ऑफ कॉमर्स ने रांची नगर निगम की सुस्त कार्यशैली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। चैम्बर के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को महापौर, उपमहापौर और निगम के आला अधिकारियों से मुलाकात कर शहर के विभिन्न रिहायशी और व्यावसायिक इलाकों के बदतर हालात से अवगत कराया। हालांकि, हर बार की तरह इस बार भी अधिकारियों की ओर से फंड की कमी और कागजी प्रक्रियाओं का ही रोना रोया गया।

अधिकारियों के वही पुराने बहाने, धरातल पर काम शून्य

चैम्बर के पदाधिकारियों ने कहा कि निगम के अधिकारी सिर्फ फंड की कमी, प्राक्कलन (Estimation) तैयार होने और आवंटन की प्रक्रिया का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहे हैं। झारखण्ड चैम्बर पिछले कई सालों से लगातार बड़ा तालाब क्षेत्र, पीपी कम्पाउंड, नाला रोड, टेलीफोन एक्सचेंज रोड, बंशीधर अडूकिया रोड और मेन रोड उर्दू लाइब्रेरी जैसे प्रमुख व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्रों में जल जमाव की समस्या को उठाता रहा है। लेकिन हर साल वही आश्वासन, वही फाइलें और वही बहाने सुनने को मिलते हैं, धरातल पर कोई ठोस काम नहीं दिखता।

घरों, मंदिरों और अस्पतालों में घुस रहा नालियों का गंदा पानी

आज हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि मामूली बारिश में भी सड़कें डूब जाती हैं। शहर के व्यापारी गंदे और बदबूदार पानी के बीच अपनी दुकानें खोलने को मजबूर हैं, जिससे उनका व्यापार चौपट हो रहा है। वहीं आम नागरिकों का घरों से निकलना दूभर हो गया है। सबसे गंभीर स्थिति बड़ा तालाब क्षेत्र की है, जहां नालियों का दूषित पानी मंदिरों, घरों, अस्पतालों और धर्मशालाओं तक में प्रवेश कर रहा है। इससे इलाके में महामारी फैलने का खतरा बढ़ गया है और लोगों के स्वास्थ्य व जीवन दोनों पर संकट मंडरा रहा है।

सरकार की छवि धूमिल कर रहे अधिकारी, मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग

चैम्बर ने इसे प्रशासनिक विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण बताते हुए कहा कि जो अधिकारी चार वर्षों में एक नाले का स्थायी समाधान नहीं निकाल पाए, वे केवल कागजी कार्रवाई के सहारे अपनी कुर्सी बचा रहे हैं। राजधानी किसी भी राज्य का आईना होती है, लेकिन अधिकारियों का यह टालमटोल वाला रवैया वर्तमान सरकार की छवि को भी धूमिल कर रहा है।

इस गंभीर संकट को देखते हुए झारखण्ड चैंबर ने माननीय मुख्यमंत्री, नगर विकास मंत्री और नगर विकास विभाग के मुख्य सचिव से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। चैम्बर ने साफ किया कि राजधानी की जनता और व्यापारियों को हर वर्ष इस त्रासदी को झेलने के लिए लावारिस नहीं छोड़ा जा सकता।

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