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Monday, June 15, 2026

नॉर्वे की क्राउन प्रिंसेस के बड़े बेटे मारियस बोर्ग होइबी को चार साल की जेल की सजा

ओस्लो । नॉर्वे के शाही परिवार की क्राउन प्रिंसेस मेटे-मैरिट (Mette-Marit) के बड़े बेटे मारियस बोर्ग होइबी (Marius Borg Høiby) को यौन अपराधों से जुड़े एक गंभीर मामले में सोमवार को चार साल की जेल की सजा सुनाई गई है। अदालत ने मामले की गहन सुनवाई के बाद अपना यह फैसला सुनाया।

अदालत का फैसला: दो आरोपों में दोषी, दो में बरी

मुकदमे की सुनवाई के बाद अदालत ने मारियस बोर्ग होइबी पर लगे आरोपों पर अपना रुख स्पष्ट किया:

  • दोषसिद्धि: अदालत ने होइबी के खिलाफ लगाए गए चार मुख्य आरोपों में से दो में उन्हें दोषी ठहराया। ये मामले उन महिलाओं से जुड़े थे जो घटना के वक्त कथित रूप से सो रही थीं या किसी कारणवश विरोध करने की स्थिति में नहीं थीं।

  • बरी: दो अन्य आरोपों में पर्याप्त साक्ष्य न होने के चलते अदालत ने उन्हें बरी कर दिया।

  • अपराध की अवधि: अदालत के दस्तावेजों के अनुसार, ये सभी अपराध साल 2018 और 2024 के बीच अंजाम दिए गए थे।

अन्य गंभीर आरोपों का भी सामना

यौन अपराधों के अलावा, 27 वर्षीय मारियस होइबी पर कई अन्य कानूनी उल्लंघन के मामले भी दर्ज थे, जिनमें शामिल हैं:

  • शारीरिक हमला (Assault)

  • नशीली दवाओं (Drugs) से जुड़े अपराध

  • अदालत द्वारा जारी प्रतिबंधात्मक आदेश (Restraining Order) का उल्लंघन

होइबी का पक्ष: होइबी ने अपने ऊपर लगे सभी गंभीर आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। हालांकि, उन्होंने नशीली दवाओं से संबंधित उल्लंघनों और कानूनी आदेशों की अवहेलना जैसे कुछ कम गंभीर अपराधों को स्वीकार किया था।

शाही परिवार से संबंध के कारण देश भर की नजरें

यह पूरा मामला नॉर्वे में लंबे समय तक मीडिया और आम जनता के बीच व्यापक चर्चा का विषय बना रहा।

  • पारिवारिक पृष्ठभूमि: मारियस बोर्ग होइबी, क्राउन प्रिंसेस मेटे-मैरिट के सबसे बड़े बेटे हैं। उनका जन्म क्राउन प्रिंसेस की प्रिंस हाकोन (Prince Haakon) से हुई शादी से पहले के एक पुराने रिश्ते से हुआ था।

  • शाही दर्जा: हालांकि होइबी के पास कोई शाही उपाधि (Royal Title) नहीं है और न ही वे कोई आधिकारिक शाही दायित्व निभाते हैं, लेकिन राजपरिवार से सीधे संबंध होने के कारण इस हाई-प्रोफाइल मुकदमे पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई थीं।

यह मुकदमा कई सप्ताह तक चला, जिसमें अदालत ने कई शिकायतकर्ताओं की गवाही और साक्ष्यों की विस्तृत जांच करने के बाद अंततः चार वर्ष के कड़े कारावास का फैसला सुनाया।

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