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Monday, June 15, 2026

प्रधानमंत्री मोदी ने नवाचार और उद्यमिता में विविधता के महत्व को किया रेखांकित

नई दिल्ली, 15 जून। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को एक विशेष संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में विविध विचारों, प्रतिभाओं तथा रचनात्मक दृष्टिकोणों की अहम भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने रेखांकित किया कि प्रत्येक व्यक्ति की सोच और कार्यशैली अनूठी होती है और यही वैचारिक विविधता नए विचारों तथा अनंत संभावनाओं को जन्म देती है।

एक्स पर साझा किया विशेष संदेश

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने संदेश में एक सुंदर उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार विभिन्न स्रोतों (कुओं या जलाशयों) के जल का स्वाद अलग-अलग होता है, उसी प्रकार हर व्यक्ति की प्रतिभा, दृष्टि और उसका योगदान भी विशिष्ट होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब इन विविध विचारों और क्षमताओं का संगम होता है, तभी नवाचार, उद्यमिता और सामूहिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त होता है।

संस्कृत सुभाषित से समझाई विविधता की शक्ति

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने अपनी बात को और प्रभावी ढंग से रखने के लिए संस्कृत के एक प्रसिद्ध सुभाषित को साझा किया:

“पिण्डे पिण्डे मतिर्भिन्ना कुण्डे कुण्डे नवं पयः। जातौ जातौ नवाचाराः नवा वाणी मुखे मुखे॥”

इस सुभाषित का सीधा अर्थ है कि प्रत्येक व्यक्ति की सोच, बुद्धि और रचनात्मक दृष्टि भिन्न होती है, ठीक वैसे ही जैसे हर जलाशय का पानी अलग होता है। यही भिन्नता और विविधता असल में नवाचार की सबसे बड़ी शक्ति है। समाज में मौजूद अलग-अलग प्रतिभाएं और विचार जब एक साथ मिलते हैं, तो वे विकास और प्रगति को एक नई व सकारात्मक दिशा देते हैं।

भारत की नवाचार संस्कृति का आधार

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज के नए भारत की नवाचार संस्कृति भी इसी भावना और दर्शन पर टिकी हुई है। यहाँ अलग-अलग पृष्ठभूमि, क्षेत्रों और अनुभवों वाले लोग अपने अनूठे विचारों और क्षमताओं के बल पर राष्ट्र निर्माण और स्टार्टअप क्रांति में अपना बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं।

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