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Tuesday, June 2, 2026

रक्षा क्षेत्र में भारत की बड़ी आत्मनिर्भरता: ‘दिव्यास्त्र’ ड्रोन बनाने का रास्ता साफ, 50 डिग्री की भीषण गर्मी में सफल परीक्षण

नई दिल्ली: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद देश की रक्षा जरूरतों को देखते हुए लॉन्ग रेंज ड्रोन विकसित करने की कोशिशों में भारत को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। अब देश में ही स्वदेशी ‘दिव्यास्त्र’ ड्रोन बनाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। भारत के घरेलू रक्षा प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम (Defense Tech Ecosystem) को मजबूती देते हुए उत्तर प्रदेश के लखनऊ की डिफेंस स्टार्टअप कंपनी ‘होवरइट’ ने ‘दिव्यास्त्र मार्क-1’ को विकसित कर इसका सफल परीक्षण भी पूरा कर लिया है। राजस्थान के जोधपुर में 50 डिग्री सेल्सियस से अधिक के झुलसाने वाले रेगिस्तानी तापमान और बेहद तेज हवाओं के बीच किए गए इस टेस्ट में ड्रोन प्लेटफॉर्म ने सबसे कठिन और विपरीत परिस्थितियों में भी बेहद भरोसेमंद प्रदर्शन किया।

कंपनी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, दिव्यास्त्र मार्क-1 ने अपने सभी ऑपरेशनल मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया, जिसमें वाहन पर लगे मोबाइल लॉन्चर से कई बार उड़ान भरना, लाइव आईएसआर मिशन (खुफिया, निगरानी और टोही) और टर्मिनल अटैक प्रोफाइल शामिल थे। इस लाइव प्रदर्शन के दौरान यूएवी को एक मोबाइल लॉन्चर से कई बार लॉन्च किया गया, जिससे युद्ध के मैदान में इसकी गतिशीलता, त्वरित तैनाती और जमीनी हालात में टैक्टिकल लॉन्च की अचूक तैयारी साबित हुई। इस सफल अभ्यास से साफ हो गया है कि यह ड्रोन गतिशील सैन्य अभियानों और टोही मिशनों में सेना की अग्रिम पंक्तियों को मजबूत करने की पूरी क्षमता रखता है।

तकनीकी विशिष्टताओं की बात करें तो दिव्यास्त्र मार्क-1 एक स्वदेशी टैक्टिकल यूएवी है, जिसे मुख्य रूप से सटीक और घातक हमलों के लिए तैयार किया गया है। यह ड्रोन 500 किलोमीटर तक की ऑपरेशनल रेंज और हवा में लगातार 5 घंटे तक मंडराने (उड़ान भरने) की क्षमता से लैस है। इसे लंबे समय तक निगरानी, सटीक लक्ष्य की पहचान और तुरंत कार्रवाई की सामरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। साथ ही, इसे जरूरत के हिसाब से अलग-अलग पेलोड, उन्नत संचार रिले सिस्टम और मिशन-विशिष्ट वॉरहेड (विस्फोटक) कॉन्फ़िगरेशन के साथ तैयार किया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि ‘दिव्यास्त्र’ नाम से भारत में दो प्रमुख और अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियां विकसित की गई हैं, जिसमें पहला ‘मिशन दिव्यास्त्र’ (मिसाइल तकनीक) है और दूसरा यही ‘दिव्यास्त्र मार्क-1’ लड़ाकू ड्रोन-लोइटरिंग म्यूनिशन है। पूरी तरह भारत में ही डिजाइन, विकसित और इंटीग्रेट किया गया यह ड्रोन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्वार्म तकनीक से संचालित होता है, जिससे कई ड्रोन एक साथ मिलकर दुश्मन के ठिकानों पर स्वायत्त रूप से सटीक हमला कर सकते हैं। यह अत्याधुनिक प्रणाली 15 किलोग्राम तक का वॉरहेड ले जाने में सक्षम है और दुश्मन के वायु रक्षा प्रणालियों को चकमा देने की अपनी खूबी के कारण भारतीय सेना के लिए युद्ध के मैदान में एक बड़ा ‘गेम-चेंजर’ साबित होने वाली है।

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