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Tuesday, June 2, 2026

ट्विशा शर्मा मौत मामला: पूर्व जज गिरिबाला सिंह और समर्थ को लेकर घटनास्थल पहुंची सीबीआई, 80 किलो की डमी से होगा सीन रीक्रिएट

भोपाल| मध्य प्रदेश की चर्चित अभिनेत्री और मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच बेहद तेज और वैज्ञानिक दौर में पहुंच चुकी है। अदालत से पांच दिनों की संयुक्त रिमांड मिलने के बाद सीबीआई की विशेष जांच टीम सोमवार सुबह रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को लेकर कड़ी सुरक्षा के बीच बागमुगालिया स्थित उनके निजी बंगले यानी घटनास्थल पहुंची। जाँच एजेंसी यहाँ फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की मौजूदगी में ‘थ्री-डायमेंशनल रीक्रिएशन’ के जरिए मौत की असल वजह का पता लगाने और मामले की कड़ियों को आपस में जोड़ने का प्रयास कर रही है।

इस वैज्ञानिक जांच के तहत ट्विशा के शारीरिक वजन के बराबर, यानी 80 किलोग्राम की एक विशेष डमी (पुतले) को कमरे में फंदे पर लटकाया जाएगा और फिर उसे नीचे उतारा जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के जरिए सीबीआई यह समझने की कोशिश कर रही है कि फंदे की ऊंचाई, झुकाव और शव को फंदे से नीचे उतारने की जो थ्योरी मुख्य आरोपित समर्थ दे रहा है, वह भौतिक और वैज्ञानिक परिस्थितियों से मेल खाती है या नहीं। सीन रीक्रिएशन के दौरान सीबीआई ने वारदात के दिन घर के आसपास मौजूद सुरक्षा गार्ड सहित हर संभावित चश्मदीद को बंगले पर तलब कर उनके बयानों का मिलान शुरू कर दिया है। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपितों को अलग-अलग और फिर एक साथ बिठाकर घटना वाले दिन की मिनट-टू-मिनट टाइमलाइन को क्रॉस चेक किया जा रहा है।

भले ही आरोपित समर्थ सिंह इस पूरी घटना को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश करते हुए यह दावा कर रहा हो कि गर्भपात (एबॉर्शन) के बाद ट्विशा गहरे डिप्रेशन में थी, लेकिन सीबीआई इस थ्योरी को आसानी से स्वीकार नहीं कर रही है। मामले की तह तक जाने के लिए जांच टीम ने उस डॉक्टर को आधिकारिक समन जारी कर तलब किया है, जिसने ट्विशा को गर्भपात की सलाह दी थी। पुलिस डॉक्टर से यह पता लगाएगी कि क्या इस गर्भपात के लिए ट्विशा की अपनी मर्जी थी या उस पर सास और पति द्वारा कोई मानसिक या शारीरिक दबाव बनाया जा रहा था।

इसके साथ ही सीबीआई को समर्थ की फरारी से जुड़े कई चौंकाने वाले डिजिटल इनपुट्स भी हाथ लगे हैं। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और बैंकिंग ट्रांजेक्शन से साफ हुआ है कि 15 मई को एफआईआर दर्ज होने के बाद भी समर्थ तुरंत फरार नहीं हुआ था, बल्कि वह तीन दिनों तक भोपाल में ही छिपकर कानूनी दांव-पेंच आजमाता रहा और इसके बाद उसने पांच दिनों तक जबलपुर में फरारी काटी। सीबीआई अब उन करीबियों की कुंडली खंगाल रही है जिन्होंने फरारी के दौरान उसकी मदद की थी। वर्तमान में सीबीआई का पूरा इन्वेस्टिगेशन इस बात पर केंद्रित है कि यदि यह हत्या है, तो शव को फंदे पर लटकाने से लेकर अस्पताल ले जाने के बीच घटनास्थल पर सबूतों से क्या-क्या छेड़छाड़ की गई है।

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