कोलकाता । पश्चिम बंगाल में सोमवार को राज्य सचिवालय नवान्न में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में नवगठित मंत्रिमंडल की दूसरी बैठक आयोजित की गई। बैठक के बाद राज्य सरकार ने महिला कल्याण, सरकारी कर्मचारियों, परिवहन और ओबीसी आरक्षण से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों की घोषणा की।
बैठक के बाद मंत्री अग्निमित्रा पाल ने प्रेसवार्ता में बताया कि महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग के तहत ‘अन्नपूर्णा योजना’ को नीतिगत मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने कहा कि ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना की मौजूदा लाभार्थी महिलाओं के नाम स्वतः ‘अन्नपूर्णा भंडार’ योजना में स्थानांतरित कर दिए जाएंगे। योजना की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी, जबकि नए आवेदकों के लिए जल्द ही ऑनलाइन पोर्टल खोला जाएगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) अथवा ट्राइब्यूनल में आवेदन करने वाले लोगों को भी इस योजना का लाभ दिया जाएगा।
मंत्रिमंडल ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के वेतन ढांचे में बदलाव के लिए सातवें राज्य वेतन आयोग के गठन को भी मंजूरी दी। हालांकि महंगाई भत्ता (डीए) को लेकर बैठक में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया। इससे पहले सरकारी कर्मचारियों के बीच डीए बढ़ोतरी को लेकर काफी उम्मीदें जताई जा रही थीं।
राज्य सरकार ने एक जून से सभी सरकारी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा सुविधा लागू करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। हालांकि बसों की संख्या बढ़ाने पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि आगामी बजट में नई इलेक्ट्रिक बसों की खरीद का प्रस्ताव लाया जा सकता है।
ओबीसी सूची और आरक्षण व्यवस्था को लेकर भी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मंत्रिमंडल ने ओबीसी सूची की पुनर्समीक्षा, उपवर्गीकरण समाप्त करने और आरक्षण प्रतिशत पर नए सिरे से विचार करने का निर्णय लिया है। मंत्री अग्निमित्रा पाल ने कहा कि उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप नई जांच कराई जाएगी और उसके आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
इसके अलावा सूचना एवं संस्कृति विभाग तथा अल्पसंख्यक कार्य एवं मदरसा शिक्षा विभाग के तहत धार्मिक वर्गीकरण के आधार पर संचालित सहायता योजनाओं को अगले महीने से बंद करने का फैसला किया गया है। सरकार जल्द ही इस संबंध में विस्तृत अधिसूचना जारी करेगी।
बैठक में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के अलावा मंत्री दिलीप घोष, निशीथ प्रमाणिक, अशोक कीर्तनिया और खुदिराम टुडू समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

