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Saturday, May 9, 2026

संताल परगना में औद्योगिक विकास की राह में ‘पजेशन’ का रोड़ा: झारखंड चैम्बर ने किया देवघर के औद्योगिक क्षेत्रों का निरीक्षण

देवघर/रांची: झारखंड के औद्योगिक क्षेत्रों की जमीनी हकीकत जानने और उद्यमियों की समस्याओं के समाधान हेतु फेडरेशन ऑफ झारखण्ड चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (FJCCI) ने एक विशेष निरीक्षण अभियान शुरू किया है। इसी क्रम में चैम्बर के सह सचिव रोहित पोद्दार के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने संताल परगना प्रमंडल के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों का दौरा कर वहां की स्थिति का जायजा लिया।

इन क्षेत्रों का हुआ निरीक्षण

प्रतिनिधिमंडल ने देवघर और आसपास के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों का दौरा किया, जिनमें शामिल हैं:

  • डाबरग्राम इंडस्ट्रियल एरिया

  • जसीडीह फेज-1 एवं फेज-2

  • देवीपुर इंडस्ट्रियल एरिया

  • सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क

  • देवघर प्लास्टिक पार्क

  • शंकरपुर रेलवे स्टेशन एवं प्रस्तावित रेलवे यार्ड

निरीक्षण में सामने आईं प्रमुख समस्याएं

निरीक्षण के दौरान उद्यमियों ने अपनी पीड़ा साझा की, जिसमें सबसे बड़ी समस्या भूमि आवंटन के बावजूद पजेशन (कब्जा) न मिलना रही।

  1. सालों का इंतजार: जसीडीह फेज-1 और 2 में कई उद्यमियों को 3 साल से पजेशन नहीं मिला है। वहीं देवीपुर में 2018 में आवंटित 81 इकाइयों को आज तक भूमि हस्तगत नहीं कराई गई है।

  2. स्थानीय विरोध: कई मामलों में बाउंड्री वॉल बनने के बाद भी स्थानीय विवादों के कारण काम रुका हुआ है, जिससे निवेशकों की भारी पूंजी फंसी हुई है।

  3. बुनियादी ढांचे का अभाव: खराब सड़कें, जल निकासी (ड्रेनेज) की समस्या और साफ-सफाई की कमी उद्योगों के विस्तार में बाधा बन रही है।

  4. नीतिगत अड़चनें: उद्यमियों ने बताया कि ‘नेचर ऑफ बिजनेस’ (प्रोजेक्ट परिवर्तन) कराने में जियाडा (JIADA) स्तर पर काफी जटिलताएं आ रही हैं।

प्लास्टिक पार्क में 100+ उद्योगों की संभावना

निरीक्षण में पाया गया कि देवघर प्लास्टिक पार्क का 95% इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार है। चैम्बर के पूर्व क्षेत्रीय उपाध्यक्ष आलोक मल्लिक ने सुझाव दिया कि सरकार प्लास्टिक एसोसिएशन के साथ मिलकर एक ‘इन्वेस्टमेंट मीट’ आयोजित करे और विशेष प्रोत्साहन पैकेज लाए। यहाँ 102 इकाइयां स्थापित हो सकती हैं, जिससे हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा।

चैम्बर के प्रमुख सुझाव और पहल
  • नियमित समीक्षा: सह सचिव रोहित पोद्दार ने हर 3 माह में स्थानीय चैम्बर और जियाडा के बीच समन्वय बैठक करने का आग्रह किया।

  • अधिकारी की नियुक्ति: जियाडा को हर 15 दिन में औद्योगिक क्षेत्रों के नियमित निरीक्षण के लिए एक अधिकृत अधिकारी नियुक्त करने का सुझाव दिया गया।

  • रिपोर्ट: चैम्बर इस पूरे निरीक्षण की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उद्योग सचिव और जियाडा प्रबंधन को सौंपेगा

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