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Tuesday, April 28, 2026

हजारीबाग वन भूमि घोटाला: निलंबित IAS विनय चौबे को झटका, हाई कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका

रांची । हजारीबाग के चर्चित वन भूमि घोटाला मामले में आरोपी निलंबित आईएएस अधिकारी विनय चौबे की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मंगलवार को झारखंड उच्च न्यायालय ने उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे सिरे से खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति अनुभा रावत चौधरी की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह फैसला सुनाया।

बता दें कि पिछले गुरुवार को इस मामले में दोनों पक्षों—विनय चौबे और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB)—की दलीलें पूरी हो गई थीं। अदालत ने लंबी बहस के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे आज सुनाया गया।

क्या है पूरा घोटाला? (कांड संख्या 11/2025)

यह मामला उस समय का है जब विनय चौबे हजारीबाग के उपायुक्त (DC) के पद पर तैनात थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने वन विभाग के 5 बड़े प्लॉटों की नियमों के विरुद्ध जाकर अवैध जमाबंदी कराई। यह जमीन ‘गैरमजरूआ खास जंगल झाड़ी’ श्रेणी की थी, जिसे बिना केंद्र सरकार की अनुमति के किसी अन्य कार्य के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता। आरोप है कि विनय चौबे ने खरीदार विनय सिंह और अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर एक आपराधिक साजिश रची और सरकारी भूमि का मालिकाना हक बदलवा दिया।

जांच में पुख्ता हुए आरोप
इस घोटाले की गूँज साल 2013 में ही सुनाई दी थी, जब विवादित जमाबंदियों को रद्द कर दिया गया था। बाद में एसीबी की प्रारंभिक जांच में भ्रष्टाचार की पुष्टि हुई। राज्य सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद 25 सितंबर 2025 को इस मामले में औपचारिक प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

अदालत ने माना कि वन संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन और सरकारी पद का दुरुपयोग एक गंभीर विषय है, जिसके आधार पर फिलहाल राहत नहीं दी जा सकती।

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