नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर शांति वार्ता शुरू होने की उम्मीद के कारण आज लगातार दूसरे दिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव में गिरावट का रुख बना हुआ नजर आया। आज के कारोबार की शुरुआत भी गिरावट के साथ हुई थी। ट्रेडिंग शुरू होने के बाद ब्रेंट क्रूड और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड के भाव में और गिरावट आ गई। डब्ल्यूटीआई क्रूड गिर कर 86.96 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक चला गया। हालांकि बाद में इसके भाव में तेजी का रुख बनता हुआ नजर आया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में फिलहाल क्रूड ऑयल सीमित दायरे में कारोबार करता हुआ नजर आ रहा है।
ब्रेंट क्रूड ने आज कमजोरी दिखाते हुए 94.45 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से कारोबार की शुरुआत की। ट्रेडिंग के दौरान ब्रेंट क्रूड फिसल कर 93.96 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया। हालांकि थोड़ी देर बाद ही इसकी कीमत में तेजी आने लगी, जिससे ये उछल कर 95.78 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गई। भारतीय समय के मुताबिक सुबह 11 बजे ब्रेंट क्रूड 95.69 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड ने भी आज कमजोर प्रदर्शन करते हुए 90.92 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से कारोबार की शुरुआत की। थोड़ी ही देर में डब्ल्यूटीआई क्रूड गिर कर 86.96 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। इस गिरावट के बाद डब्ल्यूटीआई क्रूड के भाव में सुधार होने लगा, जिससे ये बढ़ कर 92.38 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया। भारतीय समय के मुताबिक सुबह 11 बजे डब्ल्यूटीआई क्रूड 91.67 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ही ईरान के साथ जल्द ही दोबारा बातचीत शुरू होने की बात कही थी। ट्रंप के इस बयान के बाद पश्चिम एशिया में जारी तनाव के थमने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की सप्लाई एक बार फिर ठीक-ठाक शुरू हो जाने की उम्मीद बन गई। इसकी वजह से कच्चे तेल के भाव में पिछले दो दिन में के दौरान लगभग आठ प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है।
आपको बता दें कि पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के करण ग्लोबल ऑयल मार्केट काफी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। इसके पहले कभी भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैसोलीन जैसे पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई इतनी बुरी तरह से प्रभावित नहीं हुई थी। सप्लाई में कमी होने के कारण दुनिया भर में फिजिकल क्रूड और गैसोलीन प्रोडक्ट्स की कीमत में तेजी आ गई है, जिसकी वजह से इन उत्पादों का आयात करने वाले देश की अर्थव्यवस्था पर काफी दबाव बढ़ गया है।
पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत में तेजी आने के कारण इंटरनल एनर्जी एजेंसी ने भी इस साल ऑयल कंजप्शन में गिरावट आने का अनुमान लगाया है। जानकारों का कहना है कि अगर कंजप्शन में कमी आई, तो इससे ग्लोबल ग्रोथ रेट पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा। खासकर, अपनी जरूरत पूरा करने के लिए पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर निर्भर रहने वाले भारत जैसे देशों की जीडीपी ग्रोथ रेट भी प्रभावित हो सकती है।

