नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में सक्रिय ‘रेत माफिया’ के दुस्साहस और राज्य सरकार की ढिलाई पर सख्त नाराजगी जताई है। कोर्ट ने सोमवार को कहा कि यह स्थिति बेहद भयावह है कि माफिया न केवल वन अधिकारियों की हत्या कर रहे हैं, बल्कि चंबल नदी पर बने महत्वपूर्ण पुल की नींव तक को खोद रहे हैं।
सरकार की मिलीभगत या नाकामी?
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने दो टूक शब्दों में कहा:
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नाक के नीचे अवैध धंधा: “यह सब सरकार की नाक के नीचे हो रहा है। या तो राज्य सरकार इसे रोकने में नाकाम है, या फिर अधिकारियों की इसमें मिलीभगत है।”
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पुल पर मंडराता खतरा: एमिकस क्यूरी ने बताया कि मध्य प्रदेश और राजस्थान को जोड़ने वाले 32 पिलर वाले पुल की नींव माफिया खोद रहे हैं। कोर्ट ने पूछा, “अगर यह पुल गिर गया, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?”
वन रक्षक की हत्या और माफिया का खौफ
सुनवाई के दौरान एक फॉरेस्ट गार्ड (वन रक्षक) की ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलकर हुई हत्या का मामला भी उठा। कोर्ट ने याद दिलाया कि पहले एक IPS अधिकारी की भी इसी तरह हत्या की जा चुकी है।
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हथियारों की कमी: एमिकस क्यूरी द्वारा वन अधिकारियों के पास सुरक्षा के लिए हथियार न होने की बात पर कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा— “आखिर राज्य सरकार है ही क्यों?”
हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरों और स्टेटस रिपोर्ट की मांग
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है:
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सीसीटीवी निगरानी: कोर्ट ने अवैध खनन पर नजर रखने के लिए हाई-रिज़ॉल्यूशन CCTV कैमरे लगाने की संभावनाओं पर रिपोर्ट मांगी है।
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जांच रिपोर्ट: फॉरेस्ट गार्ड की हत्या मामले में अब तक हुई जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है।
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गोली मारने का अधिकार: कोर्ट को बताया गया कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और यूपी ने माफियाओं पर गोली चलाने के अधिकार की मंजूरी मांगी है, जैसा कि ओडिशा और असम जैसे राज्यों में है।

