वाशिंगटन । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर किए गए हमले को उनके और उनके सहयोगियों द्वारा लगभग 50 वर्षों से की जा रही हिंसा का प्रतिशोध बताया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। बुधवार रात अपने राष्ट्र के नाम संबोधन के दौरान, ट्रंप ने युद्ध के प्रति अमेरिकी जनता का समर्थन जुटाने का प्रयास किया। करीब 20 मिनट के इस संबोधन में उन्होंने अमेरिकी सैन्य अभियान की सराहना की और नागरिकों से संयम रखने की अपील की। उन्होंने इस संघर्ष को अमेरिकियों के सुरक्षित भविष्य के लिए एक “सार्थक निवेश” करार दिया। यह ट्रंप का उस समय से जारी युद्ध के बीच ईरान पर केंद्रित पहला संबोधन था।
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने कहा, “मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि हम अपने मुख्य रणनीतिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के करीब हैं।” उन्होंने दोहराया कि आगामी दो-तीन सप्ताह में ईरान पर बड़े पैमाने पर बमबारी कर इसे “पाषाण युग में लौटने” पर मजबूर कर देंगे। इसके साथ, उन्होंने ईरान के बिजली संयंत्रों पर हमला करने जैसे कदम उठाने की संभावनाओं को भी पुनः व्यक्त किया। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान का नया नेतृत्व पहले की तुलना में कम कट्टरपंथी और अधिक व्यावहारिक है। हालांकि, अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करेगा।
ट्रंप ने आगे कहा कि अमेरिकी अधिकारी इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए मध्यस्थता पर काम कर रहे हैं। व्हाइट हाउस से अपने संबोधन में उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान में सत्ता परिवर्तन कर दिया है और प्रमुख नेताओं को हटा दिया गया है। उन्होंने कहा, “अगर समझौते तक नहीं पहुंचा जा सका, तो हम उनके ऊर्जा स्रोतों पर सीधा प्रहार करेंगे।”
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अमेरिका ने अभी तक ईरान के तेल भंडार पर हमला नहीं किया है, जबकि वह यह आसानी से कर सकता था। इस दौरान उन्होंने अमेरिका द्वारा अतीत में लड़े गए युद्धों के समय और अवधि को गिनाया—जैसे प्रथम विश्व युद्ध, द्वितीय विश्व युद्ध, कोरियाई युद्ध, वियतनाम युद्ध और इराक युद्ध—और वर्तमान संघर्ष को उनसे अलग बताया। ट्रंप ने जोर दिया कि यह संघर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा और सुरक्षित भविष्य के लिए आवश्यक है।
उन्होंने उन नागरिकों को आश्वस्त करने की कोशिश की जो विदेशी युद्धों और घरेलू स्तर पर बढ़ती गैस की कीमतों को लेकर चिंतित हैं। राष्ट्रपति ने कहा, “हम 32 दिनों से ईरान जैसे शक्तिशाली देश के खिलाफ एक सैन्य अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। यह मिशन इतना प्रभावशाली रहा है कि अब ईरान हमारे लिए कोई बड़ा खतरा नहीं बचा है। यह हमारे बच्चों और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने वाला कदम है।”
अपने संबोधन में ट्रंप ने अनुमान लगाया कि युद्ध अगले दो-तीन हफ्तों में समाप्त हो सकता है। उन्होंने कहा, “आज रात मुझे यह कहकर खुशी हो रही है कि हम अपने मुख्य उद्देश्यों को हासिल करने के बेहद करीब हैं।” उन्होंने दावा किया कि ईरान की नौसेना और वायुसेना लगभग समाप्त हो चुकी हैं, उनकी मिसाइल प्रणालियां नष्ट हो चुकी हैं, और उनकी सैन्य शक्ति काफी हद तक कमजोर हो गई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिका ने उनकी परमाणु क्षमता को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
अपने भाषण में ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपतियों पर निशाना साधा और उन्हें दोषी ठहराया कि उन्होंने ईरानी शासन के उभार को रोकने के लिए समय रहते कदम नहीं उठाए। उन्होंने कहा, “हमें ईरान का तेल या किसी भी चीज़ की जरूरत नहीं है। हम केवल अपने सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वहां मौजूद हैं।”
गैस की बढ़ती कीमतों के बारे में बात करते हुए ट्रंप ने इसका दोष ईरानी शासन पर मढ़ा। उनका कहना था कि पड़ोसी देशों और वाणिज्यिक तेल टैंकरों के खिलाफ ईरान द्वारा किए गए हिंसात्मक हमले ही इस कारण हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसा व्यवहार दिखाता है कि परमाणु हथियारों से लैस ईरान पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता।

