नई दिल्ली। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के विवादित वीडियो मामले में गुरुग्राम में एफआईआर (FIR) दर्ज होने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उन पर तीखा हमला बोला है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री मान ने भारी धनबल का उपयोग करके एक झूठी फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करवाई और सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का प्रयास किया।
फॉरेंसिक रिपोर्ट में असली निकला वीडियो: मनजिंदर सिंह सिरसा
बुधवार को भाजपा मुख्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने पंजाब के मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए। सिरसा ने कहा कि एक वीडियो सामने आया था, जिसमें भगवंत मान कथित तौर पर गुरु साहिबान के पवित्र स्वरूप पर शराब के छींटे मारते हुए दिखाई दे रहे थे। इस घटना से दुनिया भर के सिखों में गहरा रोष और पीड़ा है।
उन्होंने बताया कि इस मामले में 5 जनवरी 2026 को श्री अकाल तख्त साहिब ने भगवंत मान को बुलाकर अपना पक्ष रखने का मौका दिया था। उस समय मान ने दावा किया था कि यह वीडियो ‘एआई जेनरेटेड’ (AI Generated) यानी फर्जी है। हालांकि, जब इस वीडियो की निष्पक्ष फॉरेंसिक जांच करवाई गई, तो यह स्पष्ट हो गया कि वीडियो पूरी तरह असली है।
अकाल तख्त ने घोषित किया ‘गुरुद्रोही’, सिख कौम से निष्कासित
सिरसा ने कहा कि सच सामने आने के बाद अकाल तख्त साहिब ने कड़ा रुख अपनाते हुए 15 जून 2026 को भगवंत मान को ‘गुरुद्रोही’ और ‘खालसा पंथ का विरोधी’ करार दिया। इसके साथ ही उन्हें सिख कौम से निष्कासित कर दिया गया और दुनिया भर के सिख समुदाय को आदेश दिया गया कि कोई भी व्यक्ति भगवंत मान के साथ किसी भी प्रकार का संबंध न रखे।
गुरुग्राम के होटल में पैसों के लेन-देन का आरोप
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि वीडियो को फर्जी साबित करने के लिए भगवंत मान के करीबी सहयोगी स्वप्न शर्मा ने गुरुग्राम के एक होटल में एक फॉरेंसिक प्रयोगशाला के लोगों के साथ गुप्त बैठक की थी। इस बैठक में भारी मात्रा में पैसों का लेन-देन हुआ ताकि वीडियो को इस तरह से एडिट (संपादित) किया जा सके, जिससे यह लगे कि वीडियो में भगवंत मान मौजूद ही नहीं थे।
सिरसा ने आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भी घेरते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल और उनके सहयोगियों ने धन का दुरुपयोग कर अकाल तख्त की सर्वोच्चता को कमजोर करने के उद्देश्य से यह झूठी रिपोर्ट तैयार करवाई थी। उन्होंने इसकी तुलना मुगल काल की दमनकारी सोच से करते हुए कहा कि कुछ लोग पैसे के लिए सिख भावनाओं की अनदेखी कर झूठा नैरेटिव गढ़ रहे हैं।
