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Friday, June 12, 2026

राज्यपाल से मिला भारत आदिवासी पार्टी का शिष्टमंडल, DMFT कार्यों में गड़बड़ी की उच्च स्तरीय जाँच और सारंडा के ग्रामीणों को वनाधिकार पट्टा देने की माँग

राँची: भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के पश्चिमी सिंहभूम जिला अध्यक्ष सुशील बाड़ला के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल ने लोक भवन, राँची में माननीय राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात की। इस दौरान शिष्टमंडल ने राज्यपाल को क्षेत्र की विभिन्न जनहित से जुड़ी समस्याओं को लेकर एक ज्ञापन सौंपा और उनसे इस दिशा में उचित पहल करने का आग्रह किया।

DMFT फंड में अनियमितता का आरोप, हाई कोर्ट की निगरानी में जाँच की माँग

राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में शिष्टमंडल ने पश्चिमी सिंहभूम जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT), चाईबासा के कार्यों में बड़े पैमाने पर कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने राज्यपाल से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जाँच झारखण्ड उच्च न्यायालय (Jharkhand High Court) की निगरानी में कराने का अनुरोध किया।

ज्ञापन के माध्यम से बताया गया कि संविधान की पाँचवीं अनुसूची के तहत अधिसूचित और खनिज संपदा से समृद्ध पश्चिमी सिंहभूम जिले में खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए DMFT में भारी राशि उपलब्ध है। इसके बावजूद स्थानीय प्रभावित लोगों को शुद्ध पेयजल, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, कौशल विकास और अन्य मूलभूत ढांचागत सुविधाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।

करोड़ों की जलापूर्ति योजना अधूरी, ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर

शिष्टमंडल ने विशेष रूप से मनोहरपुर प्रखंड के राजस्व ग्राम लाइलोर में स्थापित जलापूर्ति योजना का उदाहरण सामने रखा। इस योजना के जरिए क्षेत्र के नौ गाँवों के ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाना था। शिकायत के अनुसार, पाइपलाइन का काम आज तक अधूरा रहने के कारण इन गाँवों के लोग आज भी दूषित और असुरक्षित जल पीने को विवश हैं।

सारंडा वन क्षेत्र के निवासियों को वनाधिकार पट्टा देने की गुहार

पेयजल और विकास योजनाओं के अलावा, शिष्टमंडल ने सारंडा वन क्षेत्र में रहने वाले लोगों के अधिकारों की ओर भी राज्यपाल का ध्यान आकृष्ट कराया। उन्होंने मांग की कि सारंडा वन क्षेत्र में वर्ष 2005 से पहले से रह रहे स्थानीय निवासियों को वनाधिकार अधिनियम, 2006 (FRA) के प्रावधानों के तहत अविलंब वनाधिकार पट्टा (Forest Rights Act Title) प्रदान किया जाए, ताकि उन्हें संविधान द्वारा प्रदत्त सभी मूलभूत और जरूरी सरकारी योजनाएँ एवं सुविधाएँ मिल सकें।

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