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Monday, August 24, 2026

राघोपुर-शंकरपुर बांध ध्वस्त, गंगा के उफान से 25 हजार लोगों पर बाढ़ का खतरा

भागलपुर। नवगछिया अनुमंडल के खरीक प्रखंड के दक्षिणी इलाके में रविवार देर रात गंगा के जलस्तर में अचानक हुई वृद्धि और तेज बहाव ने भारी तबाही का खतरा पैदा कर दिया। राघोपुर-शंकरपुर (काजीकोरैया) मुख्य जमींदारी बांध का करीब 200 मीटर हिस्सा तेज धारा की चपेट में आकर ध्वस्त हो गया। बांध टूटने के बाद गंगा का पानी तेजी से रिहायशी और कृषि क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है। इससे खरीक दक्षिणी क्षेत्र के कई गांवों में दहशत का माहौल है और ग्रामीणों को वर्ष 2008 की विनाशकारी बाढ़ की याद सताने लगी है।

बांध के बड़े हिस्से के टूटने से जल संसाधन विभाग के कैंप कार्यालय का करीब आधा हिस्सा भी नदी में समा गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गंगा की तेज धारा के सामने बांध का हिस्सा देखते ही देखते बह गया। घटना के बाद आसपास के ग्रामीण इलाकों में अफरा-तफरी मच गई और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे।

बांध टूटने से खरीक प्रखंड की राघोपुर, लोकमानपुर, उस्मानपुर और तुलसीपुर समेत कई निचली पंचायतों के गांवों पर बाढ़ का सीधा खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पानी का बहाव इसी गति से जारी रहा तो क्षेत्र की 25 हजार से अधिक आबादी प्रभावित हो सकती है। कई परिवारों ने ऊंचे स्थानों और राष्ट्रीय राजमार्ग की ओर जाना शुरू कर दिया है। लोग अनाज, मवेशी और घरेलू सामान लेकर सुरक्षित ठिकानों की तलाश कर रहे हैं।

बाढ़ की आशंका ने किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है। नवगछिया और खरीक क्षेत्र की पहचान मानी जाने वाली केले की सैकड़ों एकड़ फसल पर डूबने का खतरा है। इसके अलावा धान, मक्का और हरी सब्जियों की तैयार फसलें भी बाढ़ के पानी की चपेट में आने की आशंका है। ग्रामीणों के मुताबिक फसलें बर्बाद हुईं तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

बांध बचाने में जुटी फ्लड फाइटिंग टीम

घटना की जानकारी मिलते ही जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता, कार्यपालक अभियंता और फ्लड फाइटिंग टीम के अधिकारी मौके पर पहुंच गए। विभाग की टीम ने मौके पर कैंप कर बचाव और बांध के शेष हिस्से को सुरक्षित रखने का प्रयास शुरू कर दिया है। सैकड़ों मजदूरों को काम पर लगाया गया है। गंगा की तेज धारा को नियंत्रित करने और कटाव रोकने के लिए बड़े पैमाने पर एनसी बैग यानी बालू भरी बोरियां और पेड़ों की बड़ी टहनियां नदी में डाली जा रही हैं।

खरीक के अंचलाधिकारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है और जान-माल की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि, गंगा का जलस्तर और बहाव तेज होने के कारण ग्रामीणों में भय बना हुआ है।

बांध टूटने के बाद प्रशासन और जल संसाधन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती पानी के तेज बहाव को रिहायशी इलाकों तक पहुंचने से रोकने की है। ग्रामीणों ने समय रहते प्रभावी कदम उठाने और प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

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