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Monday, August 24, 2026

जेपीएससी परीक्षा अनियमितता मामले में कोचिंग संस्थानों तक पहुंची सीआईडी जांच

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच अब कोचिंग संस्थानों और उनसे जुड़े लोगों तक पहुंच गई है। अपराध अनुसंधान विभाग ने मामले की जांच तेज करते हुए रांची और हजारीबाग में कई ठिकानों पर दस्तावेज और अभिलेख खंगाले हैं। सीआईडी की टीम ने रांची के लालपुर स्थित शिवांगन की पाठशाला और इसके संचालक संजीत कुमार के रातू रोड स्थित आवास की जांच की। इसके अलावा हजारीबाग स्थित मेधा कोचिंग सेंटर में भी पहुंचकर संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल की गई। जांच के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटाए गए हैं।

सीआईडी के अनुसार, जेपीएससी की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर दर्ज सीआईडी कांड संख्या 16/2026 के अनुसंधान के क्रम में यह कार्रवाई की गई है। जांच टीम ने दोनों स्थानों पर उपलब्ध दस्तावेजों, अभिलेखों और अन्य सामग्री की बारीकी से पड़ताल की। बरामद और एकत्र किए गए दस्तावेजों का अब अध्ययन किया जा रहा है, ताकि परीक्षा में कथित गड़बड़ी से जुड़े लोगों की भूमिका और उनके बीच संभावित कड़ियों का पता लगाया जा सके।

हालांकि, सीआईडी ने फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया है कि तलाशी और जांच के दौरान कौन-कौन से महत्वपूर्ण दस्तावेज या साक्ष्य मिले हैं। जांच एजेंसी इन रिकॉर्ड के आधार पर मामले में शामिल लोगों के बीच संपर्क, परीक्षा से जुड़ी गतिविधियों और कथित अनियमितताओं की पूरी कड़ी को समझने की कोशिश कर रही है।

25 से अधिक लोगों की हो चुकी है गिरफ्तारी

जेपीएससी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही सीआईडी और एसआईटी की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है। अब तक इस मामले में 25 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। गिरफ्तार लोगों में जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते भी शामिल हैं, जिन्हें 10 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था।

मामले में कथित मास्टरमाइंड अभय तिवारी के अलावा उसके भाई अक्षय तिवारी, पत्नी सुषमा कुमारी, कुछ कंप्यूटर ऑपरेटर और कई बिचौलियों को भी गिरफ्तार किया गया है। अभय तिवारी, उसकी पत्नी और भाई फिलहाल सीआईडी रिमांड पर हैं। जांच एजेंसी तीनों से लगातार पूछताछ कर मामले की अन्य कड़ियों और कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी जुटाने में लगी है।

ओएमआर और डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच

जांच का दायरा अब दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ डिजिटल रिकॉर्ड तक पहुंच गया है। सीआईडी सफल अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट की कार्बन कॉपियों का मिलान कर रही है। इसके अलावा जब्त सर्वर और डिजिटल डेटा लॉग की फोरेंसिक जांच भी जारी है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित अनियमितता किस स्तर पर हुई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

इधर, विवाद के बाद जेपीएससी और जेएसएससी में पिछले दस वर्षों से पदस्थापित 11 अधिकारियों को हटाया जा चुका है। आयोग के सदस्यों के इस्तीफे की कार्रवाई भी सामने आई है। ऐसे में कोचिंग संस्थानों से मिले दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच को मामले में महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।

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