रांची: झारखंड सरकार द्वारा घोषित ‘झारखंड बिल्डिंग रेगुलेराइजेशन स्कीम 2026’ को प्रभावी ढंग से लागू करने और इसके तकनीकी पहलुओं पर चर्चा के लिए गुरुवार को चेंबर भवन में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (FJCCI) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स (IIA), झारखंड चैप्टर के पदाधिकारियों ने इस योजना को जनहितैषी बताते हुए सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण सुझाव रखने का निर्णय लिया है।
योजना की सराहना, लेकिन प्रक्रिया पर सवाल
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि इस योजना से उन हजारों भवन स्वामियों को बड़ी राहत मिलेगी, जिनके निर्माण में मामूली विचलन (deviation) है। हालांकि, योजना का लाभ आम जनता तक पारदर्शी तरीके से पहुँचाने के लिए कुछ स्पष्टता की आवश्यकता है।
बैठक के 4 मुख्य प्रस्ताव और सुझाव:
-
विस्तृत SOP की मांग: सदस्यों ने सर्वसम्मति से मांग की कि सरकार इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक विस्तृत Standard Operating Procedure (SOP) जारी करे। इससे आवेदकों, आर्किटेक्ट्स और सरकारी अधिकारियों के बीच किसी भी प्रकार का भ्रम नहीं रहेगा।
-
ऑनलाइन पोर्टल का सरलीकरण: सरकार से आग्रह किया गया कि समर्पित ऑनलाइन पोर्टल को जल्द सक्रिय किया जाए। पोर्टल पर आवेदन के साथ-साथ नक्शे की PDF फाइल अपलोड करने की अनिवार्य सुविधा दी जानी चाहिए।
-
60 दिनों का ग्रेस पीरियड: चेंबर और IIA ने प्रस्ताव दिया है कि आवेदन के लिए निर्धारित 60 दिनों की समय सीमा तभी से गिनी जाए, जब पोर्टल पूर्ण रूप से सक्रिय और त्रुटिहीन हो जाए।
-
सरकार से वार्ता: इन मांगों को लेकर चेंबर और IIA का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही सरकार के संबंधित उच्चाधिकारियों के साथ बैठक करेगा।
“हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार की इस सकारात्मक पहल का लाभ अधिकतम लोगों को मिले। इसके लिए पूरी प्रक्रिया का सुगम और डिजिटल होना अनिवार्य है।” — चेंबर पदाधिकारी
बैठक में चेंबर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा, उपाध्यक्ष प्रवीण लोहिया, राम बांगड़, महासचिव रोहित अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष किशोर मंत्री के अलावा IIA झारखंड चैप्टर के चेयरमैन अतुल सराफ, सदस्य अरुण कुमार, संतोष कुमार, संजय कुमार बुधिया एवं अन्य आर्किटेक्ट्स उपस्थित थे।

