नई दिल्ली । सांख्यिकी मंत्रालय ने गुरुवार को राज्यों के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) की गणना के लिए 2022-23 को आधार वर्ष मानते हुए एक समान दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस कदम से सभी राज्यों में मानकीकृत ढांचे और प्रदर्शन की तुलनात्मकता सुनिश्चित की जा सकेगी।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने जारी एक बयान में कहा कि राष्ट्रीय लेखा खातों की गणना के लिए आधार वर्ष को पहले ही 2022-23 में बदल दिया गया है ताकि नये आंकड़ों और विकसित हो रहे अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ बेहतर अनुमान पद्धतियों को शामिल करके अर्थव्यवस्था की वर्तमान संरचना को अधिक सटीक रूप से समझा जा सके।
मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रीय लेखा के आधार वर्ष को अपडेट कर 2022-23 कर दिया है। इस संशोधन का उद्देश्य आधुनिक डेटा स्रोतों और विकसित हो रहे अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बेहतर अनुमान पद्धतियों को शामिल करके अर्थव्यवस्था की वर्तमान संरचना को अधिक सटीक रूप से प्रस्तुत करना है। इस परिवर्तन के अनुरूप राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) संकलन के लिए नए आधार वर्ष को अपनाना अनिवार्य है। इससे क्षेत्रीय आर्थिक प्रदर्शन के आकलन में अधिक सटीकता, एकरूपता और तुलनीयता सुनिश्चित हो सकेगी।
एमओएसपीआई ने कहा कि इस परिवर्तन को दिशा देने के लिए राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी सलाहकार समिति (एसीएनएएस) ने क्षेत्रीय लेखा उप-समिति का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता आईआईएम, अहमदाबाद के पूर्व प्रोफेसर प्रो. रविंद्र एच. ढोलकिया ने की। इसमें राज्य सरकारों, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), नीति आयोग, शिक्षाविदों और अनुसंधान संस्थानों के सदस्य शामिल हैं। इसका उद्देश्य राज्य घरेलू उत्पाद (एसडीपी) और जिला घरेलू उत्पाद (डीडीपी) के संकलन के लिए अवधारणाओं, कार्यप्रणालियों और उभरते डेटा स्रोतों की समीक्षा करना है।

