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Saturday, April 18, 2026

अगर गलत संगत में बिगड़ रहा ही आपका बच्चा … जाने कैसे सुधारे बच्चे को

अक्सर पेरेंट्स बताते हैं कि उनका बच्चा दोस्तों की संगत में गलत आदतें सीख रहा है और उन्हें समझ नहीं आ रहा कि स्थिति को कैसे संभालें। इस मामले में मेरा कहना है कि बच्चे जब बड़े होते हैं, तो कई बार पीयर प्रेशर यानी दोस्तों के दबाव में आ जाते हैं। इस वजह से वे कई बार गलत आदतें भी सीख लेते हैं, जैसे परीक्षा में नकल या फ‍िर दूसरों को परेशान करना।

हालांकि, ऐसे समय में बच्चों पर कड़ी निगरानी रखने या डांट-डपट करने के बजाय उन्हें सोचने और अपने काम के परिणाम समझने की आदत सिखानी चाहिए। साथ ही, उन्हें यह भी समझाना चाहिए कि किसी की नकल करने से पहले थोड़ा रुककर खुद से सोचना भी जरूरी है।

क्‍या होता है पीयर प्रेशर?
पीयर प्रेशर यानी साथियों का दबाव बचपन में एक बेहद आम बात होती है। दरअसल,जब बच्चे बड़े होने लगते हैं और अपने क्लासमेट्स व दोस्तों के साथ मिलना-जुलना शुरू करते हैं, तो वे अक्सर उनके ग्रुप में शामिल होने और स्वीकार किए जाने के लिए उन्हीं की तरह सोचने और व्यवहार करने लगते हैं। यह प्रभाव सकारात्मक भी हो सकता है और नकारात्मक भी।

गलत प्रीयर प्रेशर के नुकसान
अगर बच्चे गलत संगत में पड़ जाते हैं, तो वे धूम्रपान, नशीली दवाओं का सेवन, शराब पीना या अन्य जोखिम भरे व्यवहार करने लगते हैं। कई बार ये आदतें लंबे समय तक माता-पिता को पता भी नहीं चल पातीं। लेकिन ऐसे व्यवहार का बच्चे की पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

पीयर प्रेशर के फायदे भी होते हैं
यह समझना बेहद जरूरी है कि पीयर प्रेशर सिर्फ नकारात्मक नहीं होता, बल्कि यह सकारात्मक भी हो सकता है। पॉज‍िट‍िव फ्रेंड्स के प्रभाव में बच्चे अच्छे काम करने के लिए प्रेरित होते हैं, जैसे साथ मिलकर पढ़ाई करना या खेलों में भाग लेना।

सोशल मीडिया है नए तरह का पीयर प्रेशर
आजकल साथियों का दबाव सिर्फ स्कूल तक सीमित नहीं रहा है। सोशल मीडिया भी बच्चों को प्रभावित कर रहा है। वहां दोस्त और ऑनलाइन इन्फ्लुएंसर नए-नए ट्रेंड और लाइफस्‍टाइल को प्रमोट करते हैं, जिन्हें देखकर बच्चे उन्हें अपनाने लगते हैं। इस वजह से बच्चे दूसरों से अपनी तुलना करने लगते हैं और उनकी तरह बनने की कोशिश करते हैं।

गलत पीयर प्रेशर के संकेत कैसे पहचानें?
पीयर प्रेशर कुछ हद तक सामान्य भी होता है और इससे बच्चे को सोशल स्किल्स विकसित करने में मदद मिलती है। लेकिन अगर बच्चा दबाव में आकर गलत काम करने लगे, अपनी बातें छिपाने लगे या ज्यादा तनाव महसूस करे, तो यह चिंता का संकेत हो सकता है। साथ ही, अगर बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखे या वह पहले से ज्यादा चुप रहने लगे, या पढ़ाई से ध्‍यान हट जाए तो यह गलत पीयर प्रेशर का संकेत हो सकता है।

पेरेंट्स अपना सकते हैं ये 4 उपाय :
1: माता-पिता को बच्चे के दोस्तों और उसके व्यवहार पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही, बच्चे से खुलकर बातचीत करनी चाहिए ताकि भरोसे का रिश्ता बन सके। इससे बच्चा अपने स्कूल, दोस्तों और समस्याओं के बारे में बिना डर के बात कर पाएगा और माता-पिता यह समझ सकेंगे कि वह किसी दबाव में तो नहीं है।

2: माता-पिता को बच्चों को अपने विचारों की अहमियत समझानी चाहिए और उन्हें यह सिखाना चाहिए कि वे सोच-समझकर फैसले लें और अपने कार्यों के परिणामों को समझें। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है।

3: बच्चों को यह आदत डालनी चाहिए कि वे किसी की नकल करने से पहले थोड़ा रुककर सोचें। इससे वे सही निर्णय ले पाएंगे और गलत साथियों के दबाव से बच सकेंगे।

4: बच्चों को यह भी सिखाना जरूरी है कि वे गलत या असहज परिस्थितियों से दूर रहें और जरूरत पड़ने पर किसी भरोसेमंद बड़े से मदद लें।

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