पश्चिमी सिंहभूम। जिले के गुवा क्षेत्र में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की रांजाबुरु खदान परियोजना के विरोध में स्थानीय ग्रामीणों का आंदोलन अब तेज हो गया है। बुधवार से दर्जनों ग्रामीण, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं, सेल गुवा जनरल ऑफिस के सामने 72 घंटे की भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। हक नहीं तो काम भी नहीं के नारे के साथ शुरू हुआ यह आंदोलन पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।
ग्रामीणों का आरोप है कि खनन से भारी मुनाफा कमाने के बावजूद सेल प्रबंधन स्थानीय युवाओं को रोजगार देने में लगातार उपेक्षा कर रहा है। लंबे समय से मांग उठाने के बावजूद सिर्फ आश्वासन मिला, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे नाराज ग्रामीण अब निर्णायक लड़ाई के मूड में हैं।
बताया गया कि 13 फरवरी को मुंडा-मानकी की अगुवाई में धरना दिया गया था, जबकि 27 फरवरी को थाली-कटोरा बजाकर विरोध जताया गया। इसके बावजूद जब 39 दिनों तक कोई पहल नहीं हुई, तो ग्रामीणों ने भूख हड़ताल का रास्ता अपनाया।
रोजगार के साथ-साथ ग्रामीणों ने खनन से हो रहे पर्यावरणीय नुकसान को भी बड़ा मुद्दा बनाया है। उनका कहना है कि खदानों से निकलने वाली धूल, मिट्टी और लाल पानी खेतों को बंजर बना रहे हैं, वहीं कारो नदी भी प्रदूषण की चपेट में आ गई है, जिससे पीने के पानी तक का संकट गहरा गया है।
इस आंदोलन का नेतृत्व सारंडा पीढ़ के मानकी सुरेश चाम्पिया कर रहे हैं। उनके साथ मुंडा सींगा सुरीन, बिरसा सुरीन, मंगता सुरीन, लालू चाम्पिया, गोमाई चाम्पिया, सोमा चाम्पिया, जेना बाड़ींग, लांगो चाम्पिया, ननिका सुरीन, मसूरी सुरीन और सोमवारी सुरीन समेत कई ग्रामीण सक्रिय हैं।
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि 72 घंटे के भीतर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो 20 अप्रैल से चक्का जाम कर खदान का काम पूरी तरह ठप कर दिया जाएगा।

