पश्चिमी सिंहभूम। जिले के सारंडा क्षेत्र में स्थित स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की रांजाबुरु खदान के खिलाफ ग्रामीणों का आंदोलन तीसरे दिन बुधवार को भी जारी रहा। 23 फरवरी की सुबह से 18 गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने खदान का संचालन ठप कर रखा है। आंदोलन रोजगार नहीं तो खनन नहीं के नारे के साथ सारंडा विकास समिति, जामकुंडिया-दुईया के बैनर तले चल रहा है।
आंदोलन का नेतृत्व सारंडा पीढ़ के मानकी लागुड़ा देवगम, मुखिया राजू शांडिल और विभिन्न गांवों के मुंडा कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि खदान संचालन ग्रामसभा की अनुमति और मानकी-मुंडाओं की सहमति के बिना शुरू कर दिया गया। उनका कहना है कि स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने के बजाय ठेका कंपनी मां सरला पावर वर्क की बाहरी लोगों को काम पर रखा गया है।
ग्रामीणों के अनुसार खदान में ड्राइवर, ऑपरेटर, हेल्पर और मजदूर तक बाहर से लाए गए हैं, जबकि आसपास के गांवों में प्रशिक्षित युवा उपलब्ध हैं। इसे आदिवासी अधिकारों की अनदेखी बताया जा रहा है। सेल गुवा के कुछ अधिकारी वार्ता के लिए पहुंचे, लेकिन ठेका कंपनी के जिम्मेदार प्रतिनिधि के अनुपस्थित रहने से कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कहा है कि जब तक स्थानीय युवाओं को लिखित रूप में रोजगार की गारंटी नहीं दी जाएगी, तब तक खदान का संचालन शुरू नहीं होने दिया जाएगा।


