रांची। भारतीय शिक्षण मंडल, झारखंड प्रांत एवं आरटीसी बीएड महाविद्यालय, बूटी के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को महाविद्यालय परिसर स्थित सभागार में गुरुपूर्णिमा (व्यास पूजा) उत्सव श्रद्धा, भक्ति और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा के अनुरूप गरिमामय वातावरण में मनाया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता, मां सरस्वती और महर्षि वेदव्यास के चित्र पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने गीत-संगीत और गुरु वंदना नृत्य की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इस दौरान शिक्षकों, बीएड-डीएलएड के विद्यार्थियों और शिक्षाविदों ने महर्षि वेदव्यास को नमन करते हुए गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आरटीसी बीएड महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. रिचा पद्मा ने की। उन्होंने कहा कि गुरु केवल ज्ञान का संचार नहीं करते, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, संस्कार और राष्ट्र निर्माण के आधार भी होते हैं। भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है और गुरुपूर्णिमा गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर प्रदान करती है।
मुख्य अतिथि आरटीसी कॉलेज के निदेशक डॉ. रुद्र नारायण महतो ने कहा कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि चरित्रवान, संस्कारित और राष्ट्रनिष्ठ नागरिकों का निर्माण करना है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को वर्तमान शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्य वक्ता भारतीय शिक्षण मंडल, झारखंड प्रांत के अध्यक्ष डॉ. रंजीत मिश्रा ने गुरुपूर्णिमा और व्यास पूजा के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महर्षि वेदव्यास भारतीय ज्ञान-विज्ञान, दर्शन और संस्कृति के महान संवाहक थे। उन्होंने वेदों का संहिताकरण, महाभारत की रचना और अठारह पुराणों की रचना के माध्यम से मानव समाज को अमूल्य ज्ञान प्रदान किया। भारतीय शिक्षण मंडल भारतीयता आधारित शिक्षा के माध्यम से इसी ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। गुरु की खोई हुई प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित करना ही महर्षि वेदव्यास के प्रति सच्ची श्रद्धा है।
विशिष्ट अतिथि भारतीय शिक्षण मंडल, झारखंड प्रांत के प्रांत मंत्री डॉ. सुबास साहु ने आरटीसी महाविद्यालय परिवार, अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और उपस्थित लोगों के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल स्थापना काल से ही शिक्षा में भारतीयता, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना के संवर्धन के लिए कार्य कर रहा है। गुरुपूर्णिमा जैसे आयोजन इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
व्यास पूजा समिति की सह संयोजक डॉ. अर्पणा शर्मा ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक, विद्यार्थी, भारतीय शिक्षण मंडल के कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में शिक्षाप्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन कल्याण मंत्र के साथ हुआ।
इस अवसर पर आरटीसी बीएड महाविद्यालय के वरिष्ठ अध्यापक डॉ. नरेश मिश्रा, बीएड विभाग के डॉ. निकू, डॉ. अंकिता दुलारी गुड़िया, डॉ. रश्मि संध्या, डॉ. प्रियंका कुमारी, डॉ. प्रिया पांडे, डॉ. भारती, डॉ. सीमा, डॉ. विनीता कुमारी, विनोद प्रसाद और राम रतन तथा डीएलएड विभाग के डॉ. ओमप्रकाश महतो, डॉ. नरेश महतो, रजनीकांत, डॉ. सिल्वा कांता लकड़ा, रेनू मिश्रा, गजाधर महतो, दिवाकर महतो, उपासना कुमारी, मिथुन सहित अन्य उपस्थित रहे।
