खूंटी। महर्षि मेंही आश्रम शांतिपुरी एवं मलियादा मुरहू में महर्षि संतसेवी परमहंस जी महाराज की 106वीं जयंती शनिवार को धूमधाम से मनाई गई। सत्संगियों ने गुरुदेव के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित किया। शांतिपुरी में स्वामी लक्ष्मण जी महाराज ने कहा कि संतसेवी जी महाराज दया और करुणा के सागर थे। उनका अवतरण लोक कल्याण के लिए हुआ। उन्होंने शाकाहार और सदाचार रहकर परमात्मा की भक्ति करने का मंत्र दिया है। मलियादा आश्रम में स्वामी वैष्णवानंद जी महाराज ने कहा कि संतसेवी जी महाराज का कहना है कि सभी कार्यों को छोड़ परमार्थ कार्य और परमात्म भक्ति करनी चाहिए। उन्होंने कहा मनुष्य माया मोह में फंसकर जीवन व्यर्थ कर रहे हैं। एक दृष्टांक में उन्होंने कहा कि एक पेड़ पर कुछ बन्दर और पक्षी रहते थे, लेकिन जब पेड़ कटने लगा तो पक्षी सब उड़ गए, लेकिन बंदरों ने पेड़ को और जोर से पकड़ लिया, जिससे वे घायल हुए,मर भी गए।इसी तरह मनुष्य सद्गुरु के भक्ति के अभाव में दुःख पा रहा है।
सत्संग और गुरु के बताए मार्ग पर चलने से सारे समस्या समाप्त हो जाते हैं। जीवन में भक्ति से ही मुक्ति मिलती है। मौके पर लोदरो लाहिरी बाबा, मुरलीधर बाबा, दिगंबर बाबा ने गुरुदेव के जीवन और उपदेशों पर प्रकाश डाला। लक्ष्मण मुंडा, मागो मुंडा ने मुंडारी में सुंदर भजन गाया। कार्यक्रम में डॉ डीएन तिवारी, संजय सत्संगी,मुचीराय मुंडा, सगुन दास, राम हरि साव, कांडे मुंडा, सुरेश पंडित, सूरजलाल गुप्ता, हरिद्वार ठाकुर, लक्ष्मण गोप, डॉ रमेशचंद्र वर्मा, हेमंत भगत, अमर सिंह मौजूद थे।


