राँची/नई दिल्ली । झारखंड के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम और उनके आप्त सचिव (PS) संजीव लाल को सर्वोच्च न्यायालय से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की जमानत याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कड़ा रुख अपनाया है। जमानत देने के बजाय, सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत और संबंधित एजेंसी को आदेश दिया है कि इस मामले से जुड़े महत्वपूर्ण गवाहों की जाँच चार सप्ताह के भीतर पूरी की जाए।
उल्लेखनीय है कि ग्रामीण विकास विभाग में हुए कथित भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आलमगीर आलम और संजीव लाल को गिरफ्तार किया था। संजीव लाल के घरेलू सहायक के ठिकाने से भारी मात्रा में नकदी बरामद होने के बाद यह मामला सुर्खियों में आया था। लंबे समय से जेल में बंद पूर्व मंत्री ने स्वास्थ्य और अन्य आधारों पर जमानत की गुहार लगाई थी, जिसे शीर्ष अदालत ने अभी स्वीकार नहीं किया है।
इस आदेश के बाद अब सबकी नजरें अगले एक महीने में होने वाली गवाहों की गवाही और कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हैं।


