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Monday, August 10, 2026

झारखंड विधानसभा में 8,399 करोड़ का अनुपूरक बजट पारित

रांची। झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन सोमवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट ध्वनिमत से पारित हो गया। सदन ने 8,399 करोड़ 31 लाख 11 हजार रुपये की अनुदान मांगों को मंजूरी दी। इसके साथ ही झारखंड विनियोग संख्या-3 विधेयक, 2026 भी पारित कर दिया गया। विधानसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

पहले अनुपूरक बजट में ग्रामीण विकास विभाग को सबसे अधिक 4,258 करोड़ 67 लाख 35 हजार रुपये का प्रावधान किया गया है। ग्रामीण कार्य विभाग के लिए 885 करोड़ 83 लाख रुपये, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के लिए 971 करोड़ से अधिक और आपदा प्रबंधन के लिए 490 करोड़ 6 लाख 89 हजार रुपये की राशि रखी गई है।

इसी तरह गृह प्रभाग के लिए 144 करोड़ 16 लाख 93 हजार रुपये, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के लिए 271 करोड़ 61 लाख 4 हजार रुपये, पंचायती राज विभाग के लिए 244 करोड़ 80 लाख रुपये और स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के लिए 218 करोड़ 16 लाख 90 हजार रुपये का प्रावधान किया गया है।

खान एवं भूतत्व विभाग को 173 करोड़ 65 लाख रुपये और कल्याण विभाग को 91 करोड़ 24 लाख 50 हजार रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी, पर्यटन, नगर विकास, वन एवं पर्यावरण समेत अन्य विभागों की अनुदान मांगों को भी सदन ने मंजूरी दी।

वित्त मंत्री ने अनुपूरक बजट पर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि वित्तीय वर्ष 2026-27 का मूल बजट 1,58,560 करोड़ रुपये का है। इसके अतिरिक्त 8,399 करोड़ 31 लाख रुपये का पहला अनुपूरक बजट लाया गया है। उन्होंने कहा कि नई योजनाओं और मूल बजट में शामिल नहीं किए गए आवश्यक खर्चों के लिए अनुपूरक बजट में राशि का प्रावधान किया जाता है।

वित्त मंत्री ने केंद्र सरकार पर झारखंड के साथ भेदभाव का आरोप भी लगाया। उन्होंने केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के बाद मिलने वाली राशि का आंकड़ा सदन में रखते हुए कहा कि झारखंड को अनुदान के रूप में अपेक्षाकृत कम राशि मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में भाजपा की सरकार नहीं होने के कारण केंद्र झारखंड के साथ भेदभाव कर रहा है।

उन्होंने राज्य की वित्तीय स्थिति को मजबूत बताते हुए कहा कि वित्तीय वर्ष के पहले चार महीनों में राजस्व प्राप्ति करीब 25 से 26 प्रतिशत रही है, जबकि राजस्व व्यय करीब 21 प्रतिशत है। उन्होंने दावा किया कि नीति आयोग ने भी झारखंड के वित्तीय प्रबंधन की सराहना की है।

वित्त मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार वित्तीय व्यवस्था को मजबूत, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसके बाद प्रथम अनुपूरक बजट की अनुदान मांगों को सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दे दी।

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