झारखंड की समृद्ध संस्कृति, पहचान और जमीनी जीवन को दर्शाती एक नई शॉर्ट फिल्म का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। यह फिल्म झारखंडी समाज की आत्मा, संघर्ष और परंपराओं को सिनेमा के माध्यम से सामने लाने का प्रयास है। फिल्म की शूटिंग पश्चिम बंगाल में की जा रही है, जबकि इसकी भाषा ठेठ नागपुरी, सादरी के मिश्रण में होगी।इस शॉर्ट फिल्म के मुख्य स्तंभ सत्या महतो हैं, जो इसमें सिंगर, एक्टर, डायरेक्टर और गीतकार की भूमिका निभा रहे हैं। उनके साथ कलाकार के रूप में सुबास महतो नजर आएंगे। फिल्म की नायिका मोनिका महतो (खलारी, झारखंड) हैं, जबकि सिनेमैटोग्राफी की जिम्मेदारी आतिफ अकाब (सिमडेगा) संभाल रहे हैं।फिल्म का एक विशेष आकर्षण झारखंडी संस्कृति पर आधारित गीत है, जिसकी रिकॉर्डिंग अपोमा स्टूडियो में की गई है। इस गीत के रिकॉर्डिस्ट अनुकेत जी हैं। वाद्य संयोजन में पारंपरिक और आधुनिक संगीत का सुंदर संगम देखने को मिलेगा—पेड पर अनुकेत, बांसुरी पर सिवप्रताप और कीबोर्ड पर विशाल महली ने संगीत को जीवंत बनाया है। यह गीत झारखंड की लोकधुन, परंपरागत वाद्ययंत्रों और सांस्कृतिक आत्मा को बखूबी दर्शाता है। फिल्म की कहानी झारखंड की मिट्टी, आम लोगों के जीवन, उनके संघर्ष और अपनी पहचान से जुड़े भावनात्मक पहलुओं पर आधारित है। फिल्म का क्लाइमेक्स दर्शकों के लिए पूरी तरह सस्पेंस में रखा गया है, जो इसे और भी रोचक बनाता है।
वेश-भूषा में भी पारंपरिकता का विशेष ध्यान रखा गया है। पुरुष कलाकार धोती, गमछा और सादा कुर्ता में नजर आएंगे, वहीं महिला कलाकार पारंपरिक साड़ी और आदिवासी आभूषणों में झारखंडी संस्कृति की झलक पेश करेंगी।यह शॉर्ट फिल्म न सिर्फ मनोरंजन का माध्यम होगी, बल्कि झारखंडी संस्कृति और पहचान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सशक्त प्रयास भी होगा।


