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Saturday, June 6, 2026

भागलपुर क्रिकेट एसोसिएशन में कथित भ्रष्टाचार को लेकर खिलाड़ी का आमरण अनशन

भागलपुर । भागलपुर क्रिकेट एसोसिएशन में कथित भ्रष्टाचार, अपारदर्शी कार्यशैली और खिलाड़ियों की लगातार उपेक्षा के खिलाफ बिहार टीम के क्रिकेट खिलाड़ी सचिन कुमार आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

अनशन पर बैठे खिलाड़ी का आरोप है कि भागलपुर क्रिकेट में वर्षों से मनमानी और बंद कमरे की राजनीति हावी है, जिसके कारण खिलाड़ियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है और जिले में क्रिकेट का विकास ठप पड़ गया है। खिलाड़ी का दावा है कि पिछले लगभग दो दशकों से एसोसिएशन में लोकतांत्रिक और निष्पक्ष चुनाव नहीं कराए गए हैं। चुनाव के नाम पर बंद कमरों में बैठकर आपसी सहमति से पदों का बंटवारा किया जाता रहा है, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। एसोसिएशन के महत्वपूर्ण पदों पर चयन प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

आरोप है कि खिलाड़ियों और क्लबों की राय को दरकिनार कर कुछ चुनिंदा लोगों द्वारा निर्णय लिए जाते हैं। आरोप है कि बी डीविजन क्लब क्रिकेट लीग वर्षों से नियमित रूप से आयोजित नहीं की गई, जबकि एक डीविजन प्रतियोगिताएं भी गिने-चुने वर्षों में ही कराई गई हैं। क्लबों से आवेदन और पंजीकरण शुल्क लेने के बावजूद लीग के आयोजन को लेकर कोई स्पष्टता नहीं रहती। एक बार सभी टीमों से शुल्क लेने के बाद भी लीग आयोजित नहीं कराई गई थी और इस वर्ष भी पंजीकरण प्रक्रिया पूरी होने के काफी समय बाद तक प्रतियोगिता को लेकर कोई आधिकारिक सूचना नहीं है। इससे खिलाड़ियों और क्लबों में भारी असंतोष है।

खिलाड़ी ने आरोप लगाया है कि क्रिकेटरों को नियमित अभ्यास और खेल गतिविधियों से वंचित किया जाता है, जिससे उनकी तैयारी और प्रदर्शन प्रभावित होता है। जिले में क्रिकेट के विकास, नई प्रतिभाओं को अवसर देने और खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावों पर भी सवाल उठाए गए हैं। महत्वपूर्ण फैसलों को गोपनीय तरीके से लेने और खिलाड़ियों को विश्वास में नहीं लेने का आरोप लगाया गया है।

खिलाड़ी का कहना है कि एसोसिएशन में जवाबदेही और पारदर्शिता का अभाव है। अनशनकारी खिलाड़ी ने जिला प्रशासन से मांग किया है कि भागलपुर क्रिकेट एसोसिएशन की कार्यप्रणाली, चुनाव प्रक्रिया, लीग संचालन और वित्तीय मामलों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही भविष्य में सभी चुनाव प्रशासन की निगरानी में पूर्ण पारदर्शिता के साथ कराए जाएं।

सचिन कुमार का कहना है कि जब तक मामले में स्पष्ट, निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आमरण अनशन जारी रहेगा।

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