छत्रपति संभाजीनगर । ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा सुभाषचंद्र बोस को लिखे गए पत्र का हवाला देते हुए ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गीत बनाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह गीत दुर्गा देवी का वर्णन करता है, और टैगोर के अनुसार मुसलमान इसे स्वीकार नहीं करेंगे। यह बात उन्होंने छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में कही, जहाँ उन्होंने टैगोर के पत्र का एक हिस्सा पढ़कर सुनाया।
ओवैसी ने कहा कि उन्होंने संसद में भी ‘वंदे मातरम्’ पर अपनी राय रखी है। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा, “अगर आपको मेरी राय सुननी है, तो अब सुननी पड़ेगी।” उन्होंने आगे कहा कि भले ही उनकी बात कुछ लोगों को पसंद न आए, लेकिन यह समझना जरूरी है। उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा सुभाषचंद्र बोस को लिखे गए पत्र का तीसरा पैराग्राफ पढ़कर बताया, जिसमें उल्लेख था कि ‘वंदे मातरम्’ दुर्गा के दस भुजाओं वाले स्वरूप का वर्णन करता है, इसलिए बंगाल के मुसलमान इसे स्वीकार नहीं कर पाएंगे।
ओवैसी ने यह भी कहा कि ‘जन गण मन’ पहले से ही राष्ट्रगान है और यह बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान की प्रस्तावना से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि संसद में विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि चुने जाते हैं, जो देश की विविधता को दर्शाते हैं, इसलिए ‘वंदे मातरम्’ को लागू करना उपयुक्त नहीं होगा, जैसा टैगोर ने भी कहा था।
ओवैसी ने यह भी दावा किया कि जो विचार टैगोर के थे, वही उनकी भी सोच है। ओवैसी ने कहा कि सुभाषचंद्र बोस और रवींद्रनाथ टैगोर की देशभक्ति प्रधानमंत्री और उनकी खुद की देशभक्ति से कहीं अधिक थी। ओवैसी ने आगे कहा कि ‘वंदे मातरम्’ गीत बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की ‘आनंदमठ’ नामक कृति में लिखा गया है, जिसमें कई मुस्लिम विरोधी बातें भी हैं। उन्होंने कहा कि यदि इन पंक्तियों को आज पढ़ा जाए तो वे स्वीकार्य नहीं लगेंगी।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वे वह पूरा पाठ उपलब्ध करा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत बनाने की चर्चा चल रही है और इसी पृष्ठभूमि में वे इसका विरोध कर रहे हैं। ओवैसी ने कहा कि भारत किसी एक धर्म का देश नहीं है, बल्कि सभी धर्मों और नास्तिकों का भी देश है।

