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Tuesday, June 30, 2026

हूल दिवस पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सिदो-कान्हू को दी श्रद्धांजलि, बोले- क्रांति की चिंगारी कभी नहीं बुझती

रांची। हूल दिवस के अवसर पर मंगलवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन मोरहाबादी स्थित सिदो-कान्हू उद्यान पहुंचे। इस दौरान उन्होंने हूल विद्रोह के महानायक अमर वीर शहीद सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

हूल क्रांति ने शोषण के खिलाफ जगाई चेतना

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि हूल दिवस भारतीय इतिहास का एक ऐतिहासिक दिन है, जब शोषण और अन्याय के खिलाफ बुलंद आवाज उठाई गई थी। उन्होंने कहा कि उस दौर में जब लोगों को शोषण से मुक्ति का कोई रास्ता नहीं दिख रहा था, तब आदिवासी समाज के वीर सपूतों ने अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का बिगुल फूंका।

उन्होंने कहा कि अमर शहीद सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, वीरांगना फूलो-झानो सहित हूल क्रांति के सभी सेनानियों ने परिणाम की चिंता किए बिना शोषण के खिलाफ लड़ाई लड़ी और देशवासियों को संघर्ष का मार्ग दिखाया।

वीरों की धरती है झारखंड

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भी समाज में जहां कहीं कमजोर और वंचित वर्गों पर अत्याचार होता है, वहीं से संघर्ष और परिवर्तन की शुरुआत होती है। उन्होंने कहा कि झारखंड के इन वीर सपूतों पर पूरे राज्य को गर्व है और उनके बलिदान की बदौलत ही झारखंड को वीरों की धरती कहा जाता है।

उन्होंने कहा कि राज्य में विभिन्न अवसरों पर महापुरुषों को याद कर उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया जाता है। हूल क्रांति के वीर सेनानियों का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

क्रांति की चिंगारी कभी नहीं बुझती

मुख्यमंत्री ने कहा कि क्रांति की आग कभी बुझती नहीं है और न ही इसे बुझाया जा सकता है। इसकी चिंगारी हमेशा जीवित रहती है। उन्होंने कहा कि देश के कई स्मारकों पर आज भी अमर शहीदों की याद में निरंतर दीप जलते रहते हैं। उन्होंने दिल्ली के राजघाट और इंडिया गेट का उदाहरण देते हुए कहा कि वीरों की इस पावन भूमि का इतिहास हमेशा स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा।

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