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Saturday, June 20, 2026

कितनी भी दुर्गति हो जाए, सत्ता से चिपके रहना कांग्रेस का स्वभाव: आदित्य साहू

इतनी दुर्गति के बावजूद भी कांग्रेस संतुष्ट तो उनका भगवान ही मालिक; भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का तीखा पलटवार

करारी हार के सदमे से नहीं उबर पाई है कांग्रेस

रांची। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कांग्रेस द्वारा राज्यसभा चुनाव परिणाम को लेकर आयोजित प्रेसवार्ता में लगाए गए आरोपों पर करारा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव में मिली करारी हार के सदमे से कांग्रेस पार्टी अभी तक उबर नहीं पाई है। इसी बौखलाहट के कारण कांग्रेस खुद अपना आत्ममंथन करने के बजाय भाजपा के खिलाफ उलूल-जुलूल बयानबाजी कर रही है। श्री साहू ने तंज कसते हुए कहा कि अब इस जन्म में कांग्रेस हार के इस सदमे से उबरने वाली भी नहीं है, क्योंकि राज्यसभा चुनाव से उनकी हार का जो सिलसिला शुरू हुआ है, वह 2029 के लोकसभा और आगामी विधानसभा चुनावों में भी जारी रहेगा।

मलाई कांग्रेस खा रही है और विष जनता पी रही है

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि इतनी किरकिरी के बाद भी कांग्रेस नेताओं द्वारा सरकार में बने रहने का बयान देना कोई आश्चर्य पैदा नहीं करता, क्योंकि चाहे कितनी भी दुर्गति हो जाए, सत्ता से चिपके रहना कांग्रेस का पुराना स्वभाव रहा है। अब इतनी फजीहत के बावजूद भी अगर कांग्रेस संतुष्ट है तो उनका भगवान ही मालिक है। कांग्रेस नेताओं के ‘विष पीने’ वाले बयान पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि कांग्रेस सरकार से चिपककर मलाई खाने का काम कर रही है, जबकि इस निकम्मे दल के शासन में होने के कारण असली विष तो राज्य की जनता को पीना पड़ रहा है।

सूटकेस और नोटों की राजनीति कांग्रेस की देन

लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए श्री साहू ने कहा कि लोकतंत्र को तार-तार करने का काम भाजपा ने नहीं, बल्कि हमेशा कांग्रेस ने किया है; भाजपा ने तो हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों को स्थापित किया है। जहां तक सूटकेस और पैसों की राजनीति की बात है, तो पूरा देश जानता है कि किस दल के नेताओं के घरों से नोटों के पहाड़ बरामद होते हैं। यह वही कांग्रेस है जिसने झारखंड आंदोलन को कभी महज तीन करोड़ रुपये में खरीदने का प्रयास किया था। पैसों से लोगों को तौलना और धनबल आधारित राजनीति करना कांग्रेस के डीएनए में शामिल है।

स्थानीय कार्यकर्ताओं पर नहीं है कांग्रेस को भरोसा

कांग्रेस द्वारा एनडीए समर्थित प्रत्याशी को ‘बाहरी’ बताए जाने पर पलटवार करते हुए आदित्य साहू ने पूछा कि कांग्रेस यह क्यों भूल जाती है कि परिमल नाथवानी पहले भी दो बार यहाँ से सांसद रह चुके हैं और उन्होंने राज्य के लिए उल्लेखनीय कार्य किए हैं। कांग्रेस को घेरते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उनके पास स्थानीय नेता या कार्यकर्ता पोलिंग एजेंट बनने लायक भी नहीं बचे थे, जो कर्नाटक के सांसद नासिर हुसैन को काउंटिंग एजेंट बनाना पड़ा? इसके अलावा झारखंड प्रभारी के. राजू और सह-प्रभारी सीरी वेल्ला प्रसाद को पोलिंग एजेंट बनाया गया, जो यह साबित करता है कि कांग्रेस को अपने स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है।

भ्रष्टाचार बढ़ाना और विकास रोकना ही मुख्य ध्येय

श्री साहू ने कहा कि कांग्रेस ध्येय और उद्देश्य की बड़ी-बड़ी बातें तो करती है, लेकिन सत्ता से चिपके रहने का उनका असली मकसद जनता बखूबी जानती है। लूट-खसोट, भ्रष्टाचार को बढ़ाना और विकास को अवरुद्ध करना ही इनका मुख्य उद्देश्य है। आज राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। राजधानी में नाक के नीचे से बच्चों का अपहरण हो रहा है और बीते छह वर्षों में 10 हजार से अधिक बेटियों व महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटनाएं हुई हैं। अंचल और ब्लॉक स्तर पर जनता की गाढ़ी कमाई लूटी जा रही है। कांग्रेस की चिकनी-चुपड़ी बातों का समय अब चला गया है और वे अपनी हरकतों से उपहास का पात्र बन चुके हैं।

विधायकों ने अंतरात्मा की आवाज पर किया मतदान

प्रेसवार्ता के अंत में आदित्य साहू ने स्पष्ट किया कि भाजपा की हमेशा इच्छा थी कि कोई जमीनी कार्यकर्ता ही राज्यसभा जाए, लेकिन पार्टी के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं था। भाजपा चाहती तो जोड़-तोड़ की राजनीति कर सकती थी, लेकिन पार्टी ने ऐसा नहीं किया। जब निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में परिमल नाथवानी ने समर्थन मांगा, तो भाजपा ने उनका समर्थन किया, जिनके लिए सभी 81 विधायक वोटर थे। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस के अपने ही विधायक उनकी नीतियों से असहमत हैं, तो किसी और पर दोष मढ़ने के बजाय कांग्रेस को आत्ममंथन करना चाहिए। वे अपने विधायकों को लामबंद नहीं रख पाए, तो इसमें भाजपा कहाँ से आ गई? विधायकों ने देशहित में अपनी अंतरात्मा की आवाज पर मतदान किया है।

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