रांची। झारखंड की जेलों में बंद ऐसे कैदियों और आरोपितों की रिहाई को लेकर दायर जनहित याचिका पर गुरुवार को झारखंड उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। मामले में प्रार्थी की ओर से सुझाए गए पांच बिंदुओं पर बहस की गई। अब इस मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी।
बेल नहीं मिलने से लंबे समय से जेल में बंद हैं कई कैदी
सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से बताया गया कि लंबे समय से जेल में बंद कई कैदी और विचाराधीन कैदी ऐसे हैं, जो एक बार भी जमानत याचिका दाखिल नहीं कर पाए हैं। वहीं, कुछ कैदियों ने एक बार जमानत आवेदन देने के बाद दोबारा आवेदन नहीं किया है।
प्रार्थी की ओर से यह भी बताया गया कि कई आरोपित आरोप पत्र दाखिल नहीं होने के बावजूद डिफॉल्ट बेल का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। यूएपीए, सीएलए और सीसीए जैसे गंभीर कानूनों के तहत आरोपित लोग भी सही तरीके से जमानत प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाने के कारण लंबे समय तक जेल में बंद हैं।
ट्रायल में देरी से बढ़ रही जेल में बंद रहने की अवधि
सुनवाई में कहा गया कि मुकदमे की सुनवाई शुरू होने में देरी के कारण भी कई आरोपी लंबे समय से जेल में बंद हैं। ऐसे मामलों में समय पर कानूनी सहायता और जमानत प्रक्रिया उपलब्ध कराने की जरूरत है।
राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता मो. शहाबुद्दीन ने पक्ष रखते हुए कहा कि ऐसे मामलों के लिए कानून में प्रावधान मौजूद हैं और सरकार तय सीमा के तहत इन बिंदुओं पर कार्रवाई करती है।
करीब एक हजार कैदियों की रिपोर्ट पहले हो चुकी है पेश
मामले की सुनवाई झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने की। इससे पहले हुई सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से आधी या एक तिहाई सजा पूरी कर चुके करीब एक हजार कैदियों से संबंधित रिपोर्ट अदालत में पेश की गई थी।
गौरतलब है कि इस मामले को लेकर स्टेन स्वामी और अन्य की ओर से झारखंड उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दाखिल की गई थी।
