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Sunday, April 19, 2026

भारत-बांग्लादेश के रिश्तों में नई सुबह: बांग्लादेशी विदेश मंत्री का आज से तीन दिवसीय दिल्ली दौरा

नई दिल्ली/ढाका | बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन और नई सरकार के गठन के बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों पर जमी बर्फ पिघलनी शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान आज, मंगलवार (7 अप्रैल 2026) से अपने तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली पहुंच रहे हैं। फरवरी में बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (BNP) की सरकार बनने के बाद किसी भी बांग्लादेशी मंत्री का यह पहला भारत दौरा है।

इन दिग्गजों से होगी मुलाकात
अपने प्रवास के दौरान खलीलुर रहमान भारत के शीर्ष नेतृत्व के साथ महत्वपूर्ण बैठकें करेंगे. एस. जयशंकर: भारतीय विदेश मंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता कर आपसी विश्वास बहाली पर जोर देंगे। अजीत डोवाल: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) के साथ सीमा सुरक्षा और आतंकवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा संभव है। हरदीप सिंह पुरी: केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री के साथ ऊर्जा सहयोग (Energy Cooperation) को लेकर बातचीत होगी।

एजेंडे में क्या है खास?
पिछले 18 महीनों (अंतरिम सरकार के कार्यकाल) के दौरान उपजे तनाव को दूर करने के लिए इस दौरे में कई प्रमुख विषयों पर चर्चा होगी:

वीजा सेवाओं की बहाली: जुलाई 2024 से निलंबित टूरिस्ट वीजा सेवाओं को फिर से शुरू करने के लिए ढाका भारत पर ‘सकारात्मक नजरिए’ के लिए दबाव डालेगा। विशेषकर मेडिकल टूरिज्म से जुड़े आर्थिक फायदों पर जोर दिया जाएगा।

नदी जल बंटवारा: तीस्ता समेत अन्य नदियों के पानी के बंटवारे से जुड़े पुराने विवादों को सुलझाने की कोशिश होगी।

बॉर्डर मैनेजमेंट: सीमा पर शांति और तस्करी रोकने के लिए सिस्टम को मजबूत करना।

व्यापार: दोनों देशों के बीच बिजनेस को आसान बनाने के तरीकों पर मंथन।

कूटनीतिक सक्रियता और रक्षा सहयोग
दौरे से ठीक पहले कूटनीतिक स्तर पर हलचल तेज रही है. सोमवार को भारतीय हाई कमिश्नर प्रणय वर्मा ने ढाका में पीएम तारिक रहमान से मुलाकात की और साझा हितों पर आधारित ‘आगे की सोच’ के साथ रिश्ते बढ़ाने की इच्छा जताई। पिछले हफ्ते बांग्लादेशी हाई कमिश्नर और भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के बीच संयुक्त प्रशिक्षण और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अहम बातचीत हुई है।

यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के दौरान हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों और भारत विरोधी बयानबाजी के कारण रिश्तों में काफी कड़वाहट आ गई थी। अब तारिक रहमान सरकार इस छवि को सुधारने और भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को नया आयाम देने की कोशिश में है।

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