नई दिल्ली। लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, संघ राज्यक्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान गुरुवार काे जनता दल यूनाइटेड के नेता और केंद्रीय पंचायतीराज मंत्री ललन सिंह ने सदन में बिलाें के समर्थन में अपना पक्ष रखा।उन्हाेंने बिहार में पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के 50 प्रतिशत आरक्षण का विराेध करने वाले लालू यादव की तरह हश्र से बचने के लिए समाजवादी
पार्टी के प्रमुख काे सावधान रहने की सलाह भी दी।
संसद में अपने भाषण की शुरुआत उन्हाेंने बिहार की राजनीति के उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2005 में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद 2006 में पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया था। ललन सिंह ने दावा किया कि उस समय लालू प्रसाद यादव ने इस फैसले का विरोध किया था, जिसका राजनीतिक असर लंबे समय तक देखने को मिला। साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव को भी इस मुद्दे पर सावधान रहने की सलाह दी। सदन में ललन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विजन “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” रहा है और महिला आरक्षण से जुड़े ये विधेयक इसी सोच के तहत लाए गए हैं। उनका कहना था कि देश की 50 प्रतिशत महिला आबादी को कानून निर्माण की प्रक्रिया में उचित भागीदारी देने के लिए यह कदम जरूरी है।
उन्होंने बताया कि पंचायत स्तर पर पहले 33 प्रतिशत आरक्षण था, जिसे कई राज्यों में बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया गया है। अब संसद और विधानसभाओं में भी महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए यह पहल की जा रही है। उन्होंने वर्ष 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार की मंशा पहले ही स्पष्ट थी और अब उसे लागू करने की दिशा में यह संशोधन विधेयक लाया गया है। परिसीमन विधेयक पर ललन सिंह ने कहा कि इसका उद्देश्य जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा सीटों का पुनर्निर्धारण करना है। उनके अनुसार, सीटों की संख्या बढ़ने से महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना और आसान हो जाएगा। उन्होंने इस प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए कहा कि इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

