काठमांडू । भगवान शिव के उपासकों के लिए खुशखबरी है। नेपाल के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा का नया सीजन अगले सप्ताह से शुरू होने जा रहा है। इस साल तीर्थयात्रियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है और अब तक लगभग 5,000 भारतीय श्रद्धालु अपनी बुकिंग पक्की कर चुके हैं। नेपाल के टूर ऑपरेटर्स यात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
हिल्सा नाका बना यात्रियों की पहली पसंद
कैलाश मानसरोवर पहुंचने के लिए नेपाल में मुख्य रूप से रसुवा का केरूंग नाका और हुम्ला का हिल्सा नाका इस्तेमाल होता है। हालांकि, कम समय और कम लागत के कारण अधिकतर भारतीय तीर्थयात्री हिल्सा मार्ग को प्राथमिकता दे रहे हैं।
हिल्सा रूट: लखनऊ से शुरू होकर नेपालगंज, सिमकोट और फिर हिल्सा होते हुए मानसरोवर।
हवाई मार्ग: कुछ यात्री ल्हासा के रास्ते विमान से भी यात्रा पूरी करते हैं।
लिपुलेक दर्रा: भारत और चीन के बीच इस मार्ग को खोलने पर भी हाल ही में सहमति बनी है।
7 दिनों में पूरी होगी यात्रा: जानें पूरा रूट मैप
एसोसिएशन फॉर कैलाश टूर ऑपरेटर्स (ACTON) के अनुसार, हिल्सा मार्ग से यात्रा सबसे सुगम है:
पहला दिन: लखनऊ से सड़क मार्ग द्वारा नेपालगंज पहुंचना और वहां विश्राम।
दूसरा दिन: नेपालगंज से विमान द्वारा सिमकोट की उड़ान।
तीसरा दिन: हेलिकॉप्टर से नेपाल-चीन सीमा (हिल्सा) पहुंचकर दार्चेन बेस कैंप में स्टे।
चौथा दिन: करीब 60 किमी दूर पवित्र कैलाश पर्वत के दर्शन।
परिक्रमा: सक्षम यात्री 52 किमी की पैदल परिक्रमा करते हैं, जबकि अन्य श्रद्धालु बेस कैंप से दर्शन कर लौट आते हैं।
पिछले साल का रिकॉर्ड और सुरक्षा व्यवस्था
जिला पुलिस कार्यालय हुम्ला के आंकड़ों के अनुसार, कोरोना काल के बाद पिछले साल यात्रा दोबारा शुरू होने पर 6,042 यात्रियों ने हिल्सा नाका का उपयोग किया था, जिनमें 5,717 भारतीय शामिल थे। इस वर्ष 35 अधिकृत टूर एंड ट्रैवल्स कंपनियों के माध्यम से बुकिंग की जा रही है ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
पर्यटन व्यवसायियों की राय
पर्यटन व्यवसायी विजय सिंह के अनुसार, नेपाल के अन्य मार्गों से यात्रा करने में कम से कम 10 दिन का समय लगता है, लेकिन हिल्सा रूट से यह केवल 7 दिनों में संभव है। यही कारण है कि भारतीय तीर्थयात्रियों के बीच यह मार्ग सबसे लोकप्रिय है।

