पुरी। भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथयात्रा महोत्सव का शुभारंभ देव स्नान यात्रा के साथ हो गया है। धार्मिक परंपरा के अनुसार स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और माता सुभद्रा 15 दिनों तक अनवसर (एकांतवास) में रहेंगे। इस दौरान श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन नहीं होंगे। 15 जुलाई को नेत्रोत्सव के बाद 16 जुलाई को भव्य रथयात्रा निकलेगी और इसी दिन से दस दिवसीय मेले का भी शुभारंभ होगा।
देव स्नान यात्रा का कार्यक्रम
मंदिर प्रशासन के अनुसार दोपहर 1 बजे देव स्नान यात्रा की पूजा प्रारंभ होगी, जो 1:45 बजे तक चलेगी। इसके बाद 1:50 बजे महाआरती होगी। दोपहर 2 बजे से 3:30 बजे तक श्रद्धालु भगवान का जलाभिषेक कर सकेंगे। इस अवसर पर 108 मंगल आरती, जगन्नाथ अष्टकम और श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ भी किया जाएगा।
15 दिन रहेंगे अनवसर में
धार्मिक मान्यता है कि स्नान पूर्णिमा पर विशेष अभिषेक के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं और 15 दिनों तक एकांतवास में रहते हैं। इस अवधि में केवल राधा-कृष्ण के दर्शन होंगे। भगवान का पंचगव्य, दूध, घी, शहद, गंगाजल तथा सुगंधित द्रव्यों से विशेष अभिषेक किया जाएगा।
53 पवित्र कलशों से होगा महाभिषेक
इस वर्ष स्नान यात्रा के लिए 53 पवित्र कलश तैयार किए गए हैं। इनमें गंगाजल, अश्वगंधा, मधु, हल्दी, इत्र और अन्य पूजन सामग्री मिलाकर भगवान का अभिषेक किया जाएगा। परंपरा के अनुसार सबसे पहले भगवान बलभद्र, फिर माता सुभद्रा और अंत में भगवान जगन्नाथ का स्नान कराया जाएगा।
16 जुलाई को निकलेगी रथयात्रा
15 जुलाई को नेत्रोत्सव के बाद 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और माता सुभद्रा भव्य रथों पर सवार होकर मौसीबाड़ी के लिए प्रस्थान करेंगे। नौ दिनों के प्रवास के बाद 25 जुलाई को तीनों विग्रहों की बहुदा यात्रा के साथ मुख्य मंदिर में वापसी होगी। सनातन परंपरा में स्नान पूर्णिमा से ही रथयात्रा महोत्सव का औपचारिक आरंभ माना जाता है।
