वाशिंगटन/तेहरान | ईरान की समुद्री नाकेबंदी के बीच पश्चिमी एशिया से बड़ी खबर आ रही है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अपने दो और युद्धपोतों को पीछे हटने का निर्देश दिया है। अब तक इस घेराबंदी से कुल 31 जहाजों को वापस बुलाया जा चुका है। हालांकि, इस सैन्य कदम के बावजूद शांति वार्ता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
ट्रंप का संघर्ष विराम और ईरान का इनकार
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्ष विराम बढ़ाने की पेशकश की है, लेकिन तेहरान ने बातचीत की मेज पर आने से साफ इनकार कर दिया है। ईरान का कहना है कि उसे अमेरिकी वादों पर “भरोसा नहीं” है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने स्पष्ट किया कि घेराबंदी और धमकियों के बीच सच्ची बातचीत संभव नहीं है। इस बीच, पाकिस्तान दोनों देशों के बीच मध्यस्थता करने और ईरान को मनाने की कोशिशों में जुटा है।
नाकेबंदी की मौजूदा स्थिति
13 अप्रैल से जारी इस नाकेबंदी में अमेरिका के 17 युद्धपोत, 100 से अधिक लड़ाकू विमान और 10,000 सैनिक शामिल हैं। अमेरिकी कमांड के अनुसार, अधिकांश जहाज फिलहाल ईरान के रणनीतिक बंदरगाह चाबहार के पास तैनात हैं। दूसरी ओर, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने होर्मुज जलडमरूमध्य में दो विदेशी जहाजों को जब्त कर अपनी आक्रामकता दिखाई है।
व्हाइट हाउस का कड़ा रुख
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलीन लेविट ने कहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने संघर्ष विराम के लिए कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं की है। यह पूरी तरह राष्ट्रपति के विवेक पर निर्भर करेगा कि यह रियायत कब तक जारी रहेगी।
इजराइली हमले में लेबनानी पत्रकार की मौत
इस कूटनीतिक गतिरोध के बीच एक दुखद खबर लेबनान से आई है। इजराइल के एक हमले में महिला पत्रकार अमल खलील की मौत हो गई है। लेबनान सरकार ने इसे ‘लक्षित हत्या’ बताते हुए इजराइल की कड़ी निंदा की है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह हमला दोनों देशों के बीच हुए संघर्ष विराम समझौते के दौरान हुआ है।

