वाशिंगटन । अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर सहमति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बड़ी कूटनीतिक सफलता की घोषणा करते हुए बताया कि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों से अपनी नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade) पूरी तरह हटा ली है। आगामी शुक्रवार को इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होने के बाद रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) फिर से पूरी तरह खुल जाएगा। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि समझौते का पूरा विस्तृत मसौदा (Draft) अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
जिनेवा में 19 जून को होगा हस्ताक्षर समारोह; पाकिस्तान-कतर ने निभाई भूमिका
सीएनएन, अल जजीरा और गल्फ न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, इस समझौते को अमलीजामा पहनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं:
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तारीख और स्थान: पाकिस्तान के विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने पुष्टि की है कि अमेरिका और ईरान के बीच इस शांति समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर शुक्रवार, 19 जून को स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर में होंगे।
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मध्यस्थ देशों की भूमिका: विदेश मंत्री डार ने इस ऐतिहासिक सहमति तक पहुंचने में पर्दे के पीछे से मदद करने और दोनों पक्षों को मनाने के प्रयासों के लिए सऊदी अरब, कतर और तुर्किये जैसे मित्र देशों का विशेष आभार व्यक्त किया है।
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टोल-फ्री होर्मुज: राष्ट्रपति ट्रंप ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा कि यह ऐतिहासिक समझौता यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में होर्मुज जलडमरूमध्य हमेशा के लिए टोल-फ्री रहे, जिससे वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति सुचारू रूप से चलती रहे।
परमाणु कार्यक्रम और रोकी गई धनराशि पर मतभेद बरकरार
भले ही दोनों देश नाकाबंदी हटाने और होर्मुज को खोलने पर सहमत हो गए हों, लेकिन भविष्य के कदमों को लेकर अमेरिका और ईरान के दावों में बड़ा विरोधाभास और मतभेद दिखाई दे रहा है:
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ईरान की शर्त: ईरान के उप विदेशमंत्री ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा है कि उनके परमाणु कार्यक्रम पर आगे की बातचीत तभी शुरू होगी, जब अमेरिका द्वारा फ्रीज (जब्त) की गई ईरान की अरबों डॉलर की धनराशि को जारी किया जाएगा।
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अमेरिका का इनकार: दूसरी ओर, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने ईरान के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है, जिससे साफ है कि परमाणु कार्यक्रम और वित्तीय लेन-देन का पेच अभी भी पूरी तरह अनसुलझा है।
इजराइल ने जताया कड़ा विरोध: “समझौता हम पर बाध्यकारी नहीं”
इस अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर इजराइल ने बेहद आक्रामक और सख्त रुख अख्तियार किया है:
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असहमत: इजराइल ने अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर अपनी गहरी असहमति जताते हुए साफ कहा कि यह समझौता इजराइल के लिए किसी भी रूप में बाध्यकारी नहीं है।
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हिज्बुल्लाह पर नो कॉम्प्रोमाइज: इजराइली नेतृत्व ने जोर देकर कहा कि वे लेबनान में सक्रिय आतंकी संगठन हिज्बुल्लाह से पैदा होने वाले खतरों को जड़ से खत्म करने के अपने संकल्प के साथ कोई भी समझौता स्वीकार नहीं करेंगे।
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ट्रंप का बयान: इसके उलट, राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इस समझौते के लिए इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को वास्तव में अमेरिका का आभारी होना चाहिए।
ट्रंप के 80वें जन्मदिन पर हुआ एलान
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने 80वें जन्मदिन के अवसर पर अमेरिका में इस ऐतिहासिक ईरान समझौते का एलान किया। इस बड़ी घोषणा के कुछ ही घंटों बाद उन्होंने देश की 250वीं वर्षगांठ के जश्न के सिलसिले में व्हाइट हाउस में एक यूएफसी (UFC) इवेंट की मेजबानी भी की। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस घोषणा के समय का विशेष ध्यान रखा गया था, क्योंकि तेहरान नहीं चाहता था कि यह एलान ईरान में आधी रात के बाद हो।
