रांची। गुमला से वर्ष 2018 से लापता छह वर्षीय बच्ची के मामले में झारखंड उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद एवं न्यायमूर्ति एके राय की खंडपीठ ने ऑनलाइन उपस्थित गुमला के पुलिस अधीक्षक (एसपी) से सवाल किया कि बच्ची की मां के साथ कथित रूप से डायन-बिसाही कहकर मारपीट की गई, फिर भी इस संबंध में अब तक प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज क्यों नहीं की गई। इस पर एसपी ने अदालत को बताया कि पुलिस के हस्तक्षेप से मारपीट की घटना को रोका गया था। उन्होंने कहा कि बच्ची की मां ने इसे पारिवारिक मामला बताते हुए प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई। हालांकि, अदालत ने इस पर गंभीरता दिखाते हुए एसपी को निर्देश दिया कि बच्ची की मां को तत्काल सुरक्षा मुहैया कराई जाए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने बच्ची के आधार कार्ड का पता लगाने संबंधी पुलिस आवेदन पर भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के डायरेक्टर को भी प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया। अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजीआई) प्रशांत पल्लव से पूछा कि छह फरवरी को संबंधित थाना पुलिस द्वारा बच्ची के आधार का पता लगाने के लिए दिए गए आवेदन पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है। झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) की सदस्य सचिव भी सुनवाई में ऑनलाइन शामिल हुईं। अदालत ने उन्हें निर्देश दिया कि झालसा, गुमला की टीम को भेजकर बच्ची की मां को दी गई धमकी, गांव से निकाले जाने की स्थिति और उसकी सुरक्षा से जुड़ी जानकारी एकत्र कर अदालत को अवगत कराया जाए।
सुनवाई के दौरान अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) गुमला और अहतू थाना प्रभारी सशरीर अदालत में उपस्थित थे। उनकी ओर से बताया गया कि बच्ची की तलाश के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है और खोज अभियान जारी है। राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता गौरव राज और श्रीकांत ने पक्ष रखा, जबकि प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता शैलेश पोद्दार ने दलीलें पेश कीं। मामले की अगली सुनवाई 12 फरवरी को निर्धारित की गई है।
उल्लेखनीय है कि सितंबर 2018 से लापता गुमला की छह वर्षीय बच्ची की बरामदगी को लेकर उसकी मां ने उच्च न्यायालय में हेबियस कॉर्पस याचिका दायर की थी। पिछली सुनवाई में अदालत को बताया गया था कि मामले की गहन जांच के लिए नई एसआईटी का गठन किया गया है, जिसने दिल्ली जाकर भी बच्ची की तलाश की। बच्ची की तस्वीर विभिन्न स्थानों पर अपलोड की गई है, लेकिन अब तक उसका पता नहीं चल सका है। वर्ष 2023 में गठित एसआईटी ने इस प्रकरण में छापेमारी कर नौ अन्य लापता बच्चों को बरामद किया था। फिलहाल बच्ची की तलाश जारी है।


