पश्चिमी सिंहभूम । पश्चिमी सिंहभूम जिले के गुवा स्थित स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की लौह अयस्क खदान में 11 मई से जारी अनिश्चितकालीन चक्का जाम आंदोलन बुधवार देर रात समाप्त हो गया। लगभग 72 घंटे तक चले इस आंदोलन के कारण खदान क्षेत्र में लौह अयस्क उत्पादन और परिवहन व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रही।
आंदोलन खदान प्रभावित 19 गांवों के ग्रामीणों, मुंडा-मानकी संघ और स्थानीय युवाओं की ओर से चलाया जा रहा था, जिसे झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा का समर्थन प्राप्त था।
बुधवार शाम 7 बजे से देर रात 11 बजे तक प्रशासन, सेल प्रबंधन और आंदोलनकारियों के बीच त्रिपक्षीय वार्ता चली। लंबी बातचीत के बाद सभी पक्षों के बीच सहमति बनी, जिसके बाद आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की गई। आंदोलनकारी स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने, विस्थापित परिवारों को नौकरी में प्राथमिकता देने तथा क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर धरने पर बैठे थे। ग्रामीणों का कहना था कि सारंडा क्षेत्र से करोड़ों रुपये का लौह अयस्क निकाला जा रहा है, लेकिन स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है।
समझौते के तहत 19 गांवों के मानकी और मुंडा ग्राम सभा आयोजित कर शिक्षित एवं कार्यकुशल बेरोजगार युवाओं की सूची तैयार करेंगे। यह सूची गुवा थाना प्रभारी को सौंपी जाएगी। इसके बाद पुलिस प्रशासन की ओर से शैक्षणिक प्रमाणपत्र, आपराधिक रिकॉर्ड और अन्य आवश्यक जांच की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद आवश्यकता के अनुसार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। समझौते में यह भी तय किया गया कि रोजगार प्रक्रिया में केवल संबंधित 19 गांवों के युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी और बाहरी लोगों को शामिल नहीं किया जाएगा।
वार्ता में सेल प्रबंधन की ओर से सीजीएम माइंस चंद्रभूषण कुमार, सीजीएम एचआर धीरेन्द्र मिश्रा, महाप्रबंधक डॉ. टी.सी. आनंद, महाप्रबंधक प्रवीण कुमार सिंह और उप महाप्रबंधक अनिल कुमार मौजूद रहे। प्रशासन की ओर से जगन्नाथपुर एसडीओ महेंद्र छोटन उरांव, किरीबुरू एसडीपीओ अजय केरकेट्टा, अंचलाधिकारी मनोज कुमार, बीडीओ पप्पू रजक, गुवा थाना प्रभारी नीतीश कुमार, किरीबुरू थाना प्रभारी रोहित कुमार तथा छोटानागरा थाना प्रभारी सैनिक समद उपस्थित थे।
वहीं आंदोलनकारियों की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, मानकी सुरेश चांपिया, मंगता सुरीन, जिला परिषद सदस्य देवकी कुमारी, सिंगा सुरीन, बिरसा सुरीन, केशव गोप, विकास गोप, गुलियन चाम्पिया, विकास पुरती, सुशील पुरती, मदन चाम्पिया, मैगरिट सिरका, रजनी पुरती, सुमित्रा पुरती, लालू चाम्पिया, लक्ष्मी चाम्पिया, लखन चाम्पिया, सोमा चाम्पिया, विजय हाईबुरु, लंका पुरती और हरि चाम्पिया समेत कई ग्रामीण प्रतिनिधि शामिल हुए।
आंदोलन समाप्त होने के बाद देर रात से खदान क्षेत्र में लौह अयस्क परिवहन और उत्पादन व्यवस्था को सामान्य करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

