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Saturday, July 18, 2026

यूसीसी पर व्यापक विमर्श, न्याय और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप लागू करने पर जोर

कोलकाता। सिस्टर निवेदिता यूनिवर्सिटी (एसएनयू) के विधि विभाग और सिटिज़न्स फॉर जस्टिस (सी4जे) के संयुक्त तत्वावधान में “यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी)” विषय पर आयोजित सेमिनार में न्यायपालिका, विधि विशेषज्ञों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने इसके संवैधानिक, ऐतिहासिक और न्यायिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने यूसीसी को न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम का उद्घाटन एसएनयू के कुलपति प्रो. अनुपम बसु ने किया। उन्होंने कहा कि बदलते कानूनी और संवैधानिक विषयों पर अकादमिक विमर्श विद्यार्थियों को व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करता है। कार्यक्रम की शुरुआत सिटिज़न्स फॉर जस्टिस के संयुक्त सचिव अधिवक्ता राजर्षि हलदार के स्वागत भाषण से हुई। इस अवसर पर संस्था के ट्रस्टी किंसुक पल्लव विश्वास भी उपस्थित रहे।

यूसीसी पर रचनात्मक संवाद की जरूरत

मुख्य वक्ता कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति (डॉ.) सम्बुद्ध चक्रवर्ती ने यूसीसी के ऐतिहासिक विकास, संवैधानिक दायित्व और वर्तमान परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक और संवैधानिक महत्व का विषय है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर रचनात्मक और संतुलित संवाद समय की आवश्यकता है।

न्यायपालिका ने समय-समय पर दिए सुधार के संकेत

विधि विशेषज्ञ प्रो. (डॉ.) प्रेम कुमार अग्रवाल ने सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यायपालिका व्यक्तिगत कानूनों में समानता और सुधार की आवश्यकता पर लगातार बल देती रही है। उन्होंने ट्रिपल तलाक मामले के फैसले और उसके कानूनी प्रभावों की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि धर्म व्यक्ति की आस्था का विषय है, जबकि कानून का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समानता, न्याय और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना है।

सामाजिक सहमति और संविधान की भावना पर दिया गया जोर

दोनों वक्ताओं ने कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड का क्रियान्वयन व्यापक संवाद, सामाजिक सहमति तथा संविधान की प्रस्तावना में निहित न्याय, समानता और गरिमा के मूल्यों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

कार्यक्रम के प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने सक्रिय भागीदारी की। अंत में विधि विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) बन्हिता बोस ने सभी अतिथियों, संकाय सदस्यों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

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