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Friday, April 3, 2026

आईजीएनसीए में शुक्रवार से सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘अयोध्या पर्व’ शुरू

नई दिल्ली। दिल्ली स्थित इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) और श्री अयोध्या पर्व न्यास के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार से तीन-दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘अयोध्या पर्व’ आयोजित होगा।

आईजीएनसीए की गुरुवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार यह कार्यक्रम 3-5 अप्रैल तक रामनगरी अयोध्या की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का केंद्र बनेगा। इस आयोजन का उद्देश्य अयोध्या की ऐतिहासिक गरिमा, लोक परंपराओं और आधुनिक विकास को एक मंच पर लाना है।

इस तीन दिवसीय उत्सव में प्रदर्शनी, संवाद, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और आध्यात्मिक सत्रों का संगम देखने को मिलेगा।

इस कार्यक्रम में श्री मणिरामदास छावनी, अयोध्या के महंत कमल नयन दास, आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक एवं मार्गदर्शक सुरेश भैयाजी जोशी, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, राजस्थान की उपमुख्यमंत्री राजकुमारी दीया कुमारी, आईजीएनसीए के अध्यक्ष रामबहादुर राय और आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी सहित अन्य हस्तियां मौजूद रहेंगी। इसमें संत-महात्माओं, विद्वानों, नीति-निर्माताओं, कलाकारों एवं जनप्रतिनिधियों की व्यापक सहभागिता होगी। इस कार्यक्रम के संयोजक फैज़ाबाद के पूर्व सांसद लल्लू सिंह हैं।

कार्यक्रम के पहले दिन (3 अप्रैल) सुबह 11 बजे ‘भविष्य की अयोध्या – नगर योजना’ विषय पर गंभीर चर्चा होगी। इसमें श्री राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र और अन्य विशेषज्ञ अयोध्या के आधुनिक स्वरूप पर विचार साझा करेंगे।

इसके अलावा, अयोध्या के धरोहर स्थलों की प्रदर्शनी, संतों का आशीर्वचन, प्रबुद्ध जन के उद्बोधन तथा विविध विमर्श सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें ‘शबरी के राम’, ‘पं. रामकिंकर उपाध्याय की दृष्टि में रामराज्य का भाव’, ‘भविष्य की अयोध्या – शासन और समाज’ जैसे विषयों पर विचार-विमर्श शामिल। इसके साथ ही, आध्यात्मिक संगीत, शास्त्रीय प्रस्तुतियां और लोककलाओं का प्रदर्शन इस सांस्कृतिक उत्सव को आकर्षण प्रदान करेंगे। इन सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ‘गीत रामायण’ पर आधारित प्रस्तुतियां, नाट्य मंचन तथा लोक कलाकारों द्वारा प्रस्तुतियां इस आयोजन को सांस्कृतिक विविधता से समृद्ध करेंगी। आयोजन स्थल पर अवधी हाट का भी आयोजन किया जाएगा, जहां पारम्परिक व्यंजन एवं स्थानीय शिल्प का अनुभव प्राप्त होगा।

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