नई दिल्ली । पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दिखने लगा है। बुधवार को कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी दर्ज की गई, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। पिछले दो दिनों के भीतर तेल की कीमतों में करीब 10 फीसदी का उछाल देखा गया है।
बाजार का ताजा हाल
ब्रेंट क्रूड: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 98 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
WTI क्रूड: वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है।
क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?
विशेषज्ञों के अनुसार, हालांकि ईरान के साथ ‘सीजफायर’ की समय-सीमा आगे बढ़ी है, लेकिन बाजार अभी भी डरा हुआ है। असली संकट सप्लाई चेन का है। जानकारों का मानना है कि जब तक आपूर्ति पूरी तरह सामान्य नहीं होती, तब तक कीमतों में स्थिरता आना मुश्किल है।
‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर टिकी नजरें
तेल बाजार के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सबसे महत्वपूर्ण मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ है। जब तक इस क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं होती और कोई ठोस शांति समझौता नहीं होता, तब तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं। इससे आने वाले समय में ईंधन की कीमतों और वैश्विक महंगाई पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
गौरतलब है कि संकट के शुरुआती दिनों में कीमतें 120 डॉलर तक पहुंच गई थीं। बीच में युद्धविराम की खबरों से कुछ राहत मिली थी, लेकिन सप्लाई में कमी की वजह से अनिश्चितता अब भी बरकरार है।

