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Wednesday, June 10, 2026

भरूच की जामा मस्जिद के तहखाने को लेकर विवाद गहराया, मूर्तियां मिलने का दावा

भरूच । गुजरात के भरूच जिले स्थित जामा मस्जिद के मूल स्वरूप को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। एक वीडियो सामने आने के बाद दावा किया जा रहा है कि मस्जिद के तहखाने में हिंदू और जैन देवी-देवताओं से जुड़ी मूर्तियां मिली हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

महंत ने किया जैन मंदिर होने का दावा

भरूच के नवचौकी ओवारा स्थित शंकराचार्य मठ के महंत मुक्तानंद स्वामी ने वीडियो जारी कर दावा किया कि जामा मस्जिद मूल रूप से जैन समरी विहार है। उनका कहना है कि लंबे समय से चल रहे प्रयासों के बाद जब लगभग 700 वर्ष पुराना तहखाना खोला गया, तो वहां से विक्रम संवत 1213 काल की भगवान मल्लिनाथ से संबंधित मूर्तियां मिलीं। उन्होंने इस स्थल को पुनः मंदिर के रूप में स्थापित करने की मांग भी की है।

दोनों पक्षों के दावे आमने-सामने

हिंदू-जैन पक्ष का दावा है कि 13वीं शताब्दी में अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल के दौरान मूल जैन समरी विहार मंदिर को मस्जिद में परिवर्तित किया गया था। उनका कहना है कि मस्जिद के स्तंभों पर आज भी जैन परंपरा से जुड़ी नक्काशी मौजूद है।

वहीं, मुस्लिम समुदाय का कहना है कि इस स्थल पर सदियों से नियमित रूप से नमाज अदा की जाती रही है और यह ऐतिहासिक मस्जिद के रूप में स्थापित है।

ट्रस्टी ने दावों को बताया विवाद पैदा करने की कोशिश

जामा मस्जिद के ट्रस्टी अब्दुल कामठी ने कहा कि यह मस्जिद वर्ष 1907 से भारत सरकार के गजट में दर्ज है और वक्फ बोर्ड के अंतर्गत पंजीकृत ट्रस्ट द्वारा संचालित की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर नया विवाद खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मामले में कानूनी सलाह ली जा रही है और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से स्थिति स्पष्ट होगी।

इस बीच, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने हाल ही में प्रतिबंधित क्षेत्र में बने अनधिकृत निर्माण को हटाया है और सुरक्षा कारणों से तहखाने की ओर जाने वाले एक प्रवेश द्वार को बंद कर दिया है।

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