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Thursday, June 4, 2026

मुख्यमंत्री का बड़ा निर्देश: प्रवासी मजदूरों की होगी मैपिंग, हर जिले में बनेगा एक मॉडल आईटीआई

रांची । मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार को झारखंड मंत्रालय में श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग तथा योजना एवं विकास विभाग की अद्यतन कार्य प्रगति की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में विभागीय मंत्री संजय प्रसाद यादव और मुख्य सचिव अविनाश कुमार सहित कई आला अधिकारियों की उपस्थिति में मुख्यमंत्री ने रोजगार सृजन कार्यक्रमों, कौशल विकास प्रशिक्षण, श्रमिक कल्याण तथा विभिन्न विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने, प्रशिक्षण कार्यक्रमों को आधुनिक बनाने और सभी पात्र श्रमिकों को कल्याणकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करने के लिए कई कड़े और महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रम विभाग की बेहतर कार्यप्रणाली से ही राज्य के श्रमिकों का उत्थान और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

तीन महीने में तैयार होगा देश के विभिन्न राज्यों में कार्यरत श्रमिकों का पूरा डाटा बेस

श्रमिकों को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने पर बल देते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने असंगठित, निर्माण एवं प्रवासी श्रमिकों का अपडेटेड डाटा शीघ्र तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने अधिकारियों को अगले 3 माह के भीतर देश के किस राज्य में झारखंड के कितने श्रमिक क्या काम कर रहे हैं, इसकी पूरी जानकारी ई-श्रम पोर्टल पर सुनिश्चित करने को कहा। इसके साथ ही ‘झारखंड राज्य प्रवासी सुलभ सहायता योजना’ के तहत देश के बड़े महानगरों जैसे नोएडा, हैदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरु और मुंबई में ‘प्रवासी सहायता केंद्र’ स्थापित किए जाएंगे, जो देश के अन्य राज्यों और विदेशों में कार्यरत राज्य के श्रमिकों को आपातकालीन व प्रशासनिक सहायता प्रदान करेंगे।

कैम्प लगाकर होगा श्रमिकों का निबंधन, कंस्ट्रक्शन साइट्स पर लगेगा सुरक्षा बोर्ड और ड्रेस कोड

मुख्यमंत्री ने श्रमिक निबंधन कार्यों में तेजी लाने के लिए श्रम विभाग को विशेष कैम्प लगाने का निर्देश दिया ताकि मनरेगा श्रमिकों सहित सभी कामगारों की ट्रैकिंग और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने श्रमिकों के लिए सेफ्टी किट (जूता, हेलमेट, ग्लव्स आदि) की राशि सीधे प्रदान करने और इसके लिए विशेष दुकानें चिन्हित करने की बात कही ताकि सामग्री आसानी से मिल सके। निर्माण कार्यों के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अब सभी कंस्ट्रक्शन साइट्स पर श्रमिकों की सुरक्षा से संबंधित अनिवार्य बोर्ड लगाए जाएंगे। इसके अलावा श्रमिकों के लिए एक विशिष्ट ड्रेस कोड भी तय किया जाएगा ताकि उनकी पहचान सुलभ हो सके।

श्रमिक बेस्ड राज्य की पहचान से बाहर निकलेगा झारखंड, चौक-चौराहों पर बनेंगे श्रमिक पड़ाव

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अधिकारियों से कहा कि विभाग कुछ ऐसी कार्य योजनाएं बनाए जिससे मजदूरों को आत्मनिर्भर बनाया जा सके और झारखंड को ‘श्रमिक बेस्ड राज्य’ के रूप में मिलने वाली पहचान से बाहर निकाला जा सके। उन्होंने रोजगार के अभाव में होने वाले ग्रामीण पलायन को हर हाल में रोकने का लक्ष्य दिया। काम की तलाश में चौक-चौराहों पर एकत्र होने वाले मजदूरों के लिए मुख्यमंत्री ने ‘श्रमिक प्वाइंट’ चिन्हित कर वहां धूप और बरसात से बचाव के लिए शेड (श्रमिक पड़ाव) निर्माण का निर्देश दिया। अधिकारियों ने बताया कि बीओसीडब्ल्यू (BOCW) बोर्ड के तहत इन श्रमिक पड़ावों को ‘श्रमिक चौक-सह-सुविधा केंद्र’ के रूप में बुनियादी सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है।

हर जिले में बनेगा मॉडल आईटीआई, प्लेसमेंट के लिए हायर होंगी बड़ी कंपनियों की फैकल्टी

राज्य के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को अपग्रेड करने का निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर नए कोर्स डिजाइन किए जाएं। राज्य के प्रत्येक जिले में एक आईटीआई को ‘मॉडल आईटीआई’ के रूप में विकसित कर उसकी ग्रेडिंग कराई जाएगी और वहां हाई वैल्यू कृषि कोर्स चालू किए जाएंगे। विद्यार्थियों को डिग्री लेकर भटकना न पड़े, इसके लिए एक मजबूत ‘एम्प्लॉयमेंट चेन’ विकसित कर प्लेसमेंट की प्रभावी व्यवस्था करने को कहा गया है। इसके लिए बड़ी कंपनियों के विशेषज्ञों और निजी संस्थानों से सेवानिवृत्त अनुभवी लोगों की फैकल्टी के रूप में सेवाएं ली जाएंगी।

मुख्यमंत्री ने जबलपुर और पुणे में कार्यरत झारखंड के युवाओं से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर की बात

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए सीधे ग्राउंड रियलिटी की जांच की। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आईटीआई धनबाद के पूर्व छात्र सूरज कुमार से बात की, जो वर्तमान में जबलपुर के एक बड़े उद्योग में 70 हजार रुपये प्रति माह के मानदेय पर कार्यरत हैं। इसके साथ ही उन्होंने लोहरदगा के मोज़ाइक स्किल ट्रेनिंग सेंटर से प्रशिक्षित अनिमा कुमारी से भी बात की, जो पुणे के एक संस्थान में कार्यरत हैं। मुख्यमंत्री ने अनिमा से उनके मानदेय, आवास व्यवस्था, भोजन और सुरक्षा की विस्तृत जानकारी ली और उनके आत्मविश्वास की सराहना की। इस उच्चस्तरीय बैठक में विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, श्रम सचिव जितेंद्र कुमार सिंह और श्रमायुक्त संदीप सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित थे।

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