रांची । मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आज झारखंड मंत्रालय में अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति में योजना एवं विकास विभाग के अद्यतन कार्य प्रगति की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में विभागीय मंत्री राधा कृष्ण किशोर और मुख्य सचिव अविनाश कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़ा निर्देश दिया कि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, बजटीय प्रावधानों और महत्वपूर्ण परियोजनाओं के कार्यान्वयन को धरातल पर उतारने के लिए कार्यों में तेजी लाएं। उन्होंने योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग (निगरानी) तथा जमीनी स्तर पर उनकी सतत प्रगति पर विशेष बल दिया ताकि निर्धारित लक्ष्यों को समय पर प्राप्त किया जा सके।
अंतर्विभागीय समन्वय से समयबद्ध तरीके से पूरी होंगी योजनाएं, विकास को मिलेगी गति
मुख्यमंत्री ने समीक्षा के दौरान अधिकारियों से स्पष्ट रूप से कहा कि योजना एवं विकास विभाग राज्य सरकार के अन्य सभी विभिन्न विभागों के साथ एक मजबूत समन्वय (को-ऑर्डिनेशन) स्थापित करे। उन्होंने चालू वित्तीय वर्ष के साथ-साथ आगामी वित्तीय वर्ष की भी सभी लंबित और नई योजनाओं को पूरी तरह समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि राज्य के सर्वांगीण विकास को गति प्रदान करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ कार्य करना आवश्यक है, जिससे समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का सीधा लाभ पहुँचाया जा सके।
इन्नोवेटिव स्कीम का बजट ढाई गुना बढ़ा, ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोजेक्ट’ के तहत होगा काम
बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य में इन्नोवेटिव स्कीमों (Innovative Schemes) को विशेष रूप से बढ़ावा देने और उन्हें गति प्रदान करने के निर्देश दिए। इस महत्वपूर्ण बिंदु पर विभागीय सचिव ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि इन्नोवेटिव स्कीम के तहत पूर्व में निर्धारित 2 करोड़ रुपये की राशि को अब ढाई गुना बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये किए जाने का नया प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त, अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष जानकारी साझा की कि राज्य में ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोजेक्ट’ (एक जिला, एक उत्पाद/परियोजना) के तहत हर जिले की विशेषता के अनुसार नई योजनाओं का चयन किया जाएगा, जिसके लिए एक व्यापक और प्रभावी कार्य योजना तैयार कर ली गई है।
पीएमयू का होगा गठन, 60% से कम खर्च करने वाले विभागों की होगी कड़ी समीक्षा
प्रशासनिक सुधारों पर चर्चा करते हुए बैठक में पिछले 5 वर्षों से लगातार चली आ रही पुरानी योजनाओं की समीक्षा की गई और उनके क्रियान्वयन में सुधार लाने अथवा अनुपयोगी योजनाओं को समाप्त करने पर विचार किया गया। इसके साथ ही, सीएसएस (CSS) स्कीम की सख्त मॉनिटरिंग और प्रशासनिक सपोर्ट के लिए एक विशेष पीएमयू (Project Management Unit) का गठन करने पर गंभीर चर्चा हुई। बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजटीय प्रावधानों की समीक्षा करते हुए कम से कम 75% राशि खर्च करने के लक्ष्य पर बल दिया गया, जबकि 60% से कम बजट खर्च करने वाले सुस्त विभागों की पहचान कर उनकी कार्यप्रणाली में सुधार लाने की बात कही गई। इसके अलावा, राज्य के दीर्घकालिक विकास के लिए अगले 10 वर्षों का एक मजबूत ‘विजन डॉक्यूमेंट’ तैयार करने का भी महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुआ।
बैठक में विकास आयुक्त और विभागीय सचिव सहित कई आला अधिकारी रहे मौजूद
योजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन को लेकर बुलाई गई इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में राज्य के विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, योजना एवं विकास विभाग के सचिव मुकेश कुमार, विभाग की अपर सचिव विजया जाधव तथा अपर निदेशक-सह-अपर सचिव कृष्ण नंदन प्रसाद सहित कई अन्य तकनीकी और प्रशासनिक अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित थे।
