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Wednesday, May 27, 2026

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने की ग्रामीण विकास विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा, कहा- पंचायतों को सशक्त कर अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाएं लाभ

रांची । झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने आज झारखंड मंत्रालय (प्रोजेक्ट भवन) में वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में ग्रामीण विकास विभाग के अद्यतन कार्य प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि ग्राम पंचायतों को प्रशासनिक व वित्तीय रूप से सशक्त बनाकर विकास की राह में खड़े अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुँचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि राज्य के सर्वांगीण विकास की यात्रा में पंचायतें ही पहली और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं, इसलिए यह अत्यंत जरूरी है कि ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित सभी जन-कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। इस महत्वपूर्ण बैठक में ग्रामीण विकास विभाग की मंत्री श्रीमती दीपिका पांडेय सिंह भी मुख्य रूप से उपस्थित थीं।

ग्रामीण आवास योजनाओं में लाएं तेजी, कोई भी पात्र न छूटे

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने ग्रामीण आवास योजनाओं की बिंदुवार समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य में ‘अबुआ आवास योजना’, ‘प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण’ एवं ‘बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर आवास योजना’ के कार्यान्वयन में तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि राज्य के भीतर वैसे पात्र लाभार्थी (लाभुक) जो वर्तमान में आवासविहीन हैं या मिट्टी के जीर्ण-शीर्ण व कच्चे घरों में रहने को मजबूर हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर ग्रामीण आवास योजना का लाभ पहुँचाया जाए। मुख्यमंत्री ने सभी आवास योजनाओं को निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने की आवश्यकता पर बल दिया।

सखी मंडलों का होगा विस्तार, बैंकों से मिलेगा ₹5,000 करोड़ का ऋण

मुख्यमंत्री ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) को राज्य के भीतर महिला स्वयं सहायता समूहों (सेल्फ-हेल्प ग्रुप/एसएचजी) की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में महिलाओं की भागीदारी क्रांतिकारी साबित हो सकती है। विभाग इन महिलाओं को खेती के साथ-साथ सौर ऊर्जा (सोलर पावर) उत्पादन जैसे आधुनिक क्षेत्रों में कार्य करने के लिए विशेष तकनीकी प्रशिक्षण देकर प्रेरित करे।

अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि जेएसएलपीएस के अंतर्गत 5,000 नए सखी मंडलों के गठन की प्रक्रिया जारी है, जिससे 60,000 नए परिवारों को जोड़ने का लक्ष्य है। इसके अलावा, राज्य के समस्त सखी मंडलों के समग्र विकास के लिए विभिन्न बैंकों के माध्यम से 5,000 करोड़ रुपये का ऋण (लोन) उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि ढाई लाख नई महिलाओं को आजीविका की विविध गतिविधियों से जोड़ा जाएगा।

‘पलाश मार्ट’ का देशव्यापी विस्तार, मुख्य पर्यटन स्थलों पर खुलेंगे बिक्री केंद्र

महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा उत्पादित वस्तुओं को बड़ा बाजार उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री ने एक व्यापक कार्ययोजना बनाने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि झारखंड के उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए अन्य राज्यों के प्रमुख व्यावसायिक व पर्यटन स्थलों पर भी ‘पलाश मार्ट’ जैसे बिक्री केंद्र स्थापित किए जाएं। अधिकारियों ने बताया कि रांची के कांके रोड में नवनिर्मित केंद्रीय पलाश मार्ट भवन का निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में है। इस वर्ष 6 नए पलाश मार्ट बनाए जाएंगे तथा आगामी वर्षों में राज्य के सभी जिलों में इसके भवन तैयार करने की योजना है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने ग्रामीण आजीविका के लिए ‘पशुधन योजना’ को और अधिक गति देने की बात कही।

आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण और ‘दीदी कैफे’ का होगा संचालन

मुख्यमंत्री ने जुट प्रोसेसिंग (पटसन प्रसंस्करण) और शहद (हनी) उत्पादन के क्षेत्र में असीम संभावनाओं को देखते हुए उत्पाद मैपिंग कराने तथा जेएसएलपीएस के जिला व प्रखंड प्रबंधकों (डीपीएम और बीपीएम) को बाजार उपलब्धता की जिम्मेदारी सौंपने का निर्देश दिया। उन्होंने ‘मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना’ के लाभार्थियों, दिव्यांग, वृद्ध एवं विधवा महिलाओं को भी अनिवार्य रूप से स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने तथा उन्हें आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण देने को कहा। इसके अलावा, प्रखंड स्तर पर संचालित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएससी) में ‘दीदी कैफे’ के संचालन की कार्ययोजना बनाने और स्वयं सहायता समूहों को सीधे बैंक लिंकेज से जोड़ने के निर्देश दिए गए।

जल संचय और ‘बिरसा हरित ग्राम योजना’ से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

जल प्रबंधन पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने लिफ्ट इरिगेशन (उद्वह सिंचाई) परियोजनाओं को सफल बनाने के लिए ग्राम पंचायतों में ‘वाटर मैनेजमेंट सिस्टम’ को बेहतर करने और ग्रामीणों को जल संचय अभियानों से जोड़ने का निर्देश दिया। वहीं, मनरेगा के अंतर्गत संचालित ‘बिरसा हरित ग्राम योजना’ की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन रही है। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में राज्य के करीब डेढ़ लाख एकड़ भूमि में इस योजना के तहत बागवानी कार्य हो रहा है, जिसमें महिला लाभार्थियों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री ने इसका जिलावार डेटाबेस (आंकड़ा संचय) तैयार करने का निर्देश दिया।

इन प्रमुख केंद्रीय व राज्य योजनाओं की भी हुई विस्तृत समीक्षा

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम), महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाय), बिरसा विशिष्ट जनजातीय विकास योजना, युवा कौशल योजना तथा वाटरशेड (जलछाजन) प्रबंधन योजनाओं की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट देखी और उनके प्रभावी संचालन हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।

इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्य रूप से राज्य के मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव मनोज कुमार, मनरेगा आयुक्त मृत्युंजय कुमार वर्णवाल, जेएसएलपीएस के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अनन्य मित्तल सहित संबंधित विभागों के सभी वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थे।

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