नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार सुबह ऋग्वेद के एक महत्वपूर्ण मंत्र को ‘सुभाषितम्’ के रूप में साझा करते हुए भारतीय परंपराओं, ज्ञान और सदाचार को आगे बढ़ाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को बुद्धि से निर्मित न्यायपूर्ण और प्रकाशमय मार्ग पर चलते हुए श्रेष्ठ कर्म करने चाहिए तथा अपने आचरण के माध्यम से समाज में अच्छे संस्कारों और दिव्य गुणों को बढ़ावा देना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने अपने एक्स हैंडल पर ऋग्वेद के दशम मंडल के 53वें सूक्त के छठे मंत्र को साझा किया। उन्होंने लिखा, ‘‘तन्तुं तन्वन्रजसो भानुमन्विहि ज्योतिष्मतः पथो रक्ष धिया कृतान्। अनुल्बणं वयत जोगुवामपो मनुर्भव जनया दैव्यं जनम्॥’’
प्रधानमंत्री की पोस्ट में इस मंत्र का भावार्थ भी बताया गया है। इसमें कहा गया है कि मनुष्य को अपनी परंपराओं और ज्ञान को आगे बढ़ाते हुए श्रेष्ठ कर्म करने चाहिए। उसे विवेक और बुद्धि से निर्मित न्यायपूर्ण तथा प्रकाशमय मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।
पोस्ट के अनुसार, मनुष्य को श्रेष्ठ जनों के सदाचार को अपने जीवन में अपनाकर निरंतर विचारशील रहना चाहिए। साथ ही समाज में ऐसे लोगों के निर्माण का प्रयास करना चाहिए, जिनमें श्रेष्ठ और दिव्य गुण मौजूद हों। प्रधानमंत्री के इस संदेश में भारतीय वैदिक ज्ञान, नैतिक मूल्यों और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
