कानपुर देहात। पावर प्लांट लगाने के नाम पर करीब डेढ़ दशक पहले मिली 944.029 हेक्टेयर जमीन पर परियोजना शुरू नहीं करने और सरकार की अनुमति के बिना भूमि बैंकों में गिरवी रखने वाली दो कंपनियों पर उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। योगी सरकार ने मैसर्स लैन्को अनपरा पावर लिमिटेड और मैसर्स हिमावत पावर प्राइवेट लिमिटेड को भोगनीपुर तहसील में आवंटित पूरी भूमि का आवंटन रद्द कर उसे सरकार के पक्ष में वापस दर्ज कराने का आदेश दिया है। राज्यपाल की अनुमति के बाद ऊर्जा विभाग ने कानपुर देहात के जिलाधिकारी को राजस्व अभिलेखों में आवश्यक बदलाव करने के निर्देश दिए हैं।
सरकार के अनुसार दोनों कंपनियों को वर्ष 2011 में थर्मल पावर प्लांट स्थापित करने के लिए जमीन दी गई थी। समझौते के मुताबिक जमीन पर कब्जा मिलने के तीन वर्ष के भीतर परियोजना का निर्माण पूरा होना था, लेकिन करीब 15 वर्ष गुजरने के बावजूद दोनों कंपनियों ने निर्माण कार्य शुरू नहीं किया। इतना ही नहीं, अनुबंध की शर्तों के विपरीत कंपनियों ने सरकार की अनुमति के बिना जमीन को बैंकों के पास बंधक रख दिया।
अलग-अलग गांवों में दी गई थी जमीन
28 जून 2011 को हुए समझौते के तहत लैन्को अनपरा पावर लिमिटेड को कृपालपुर, चपरघटा, रसूलपुर भुरण्डा और भरतौली गांवों में कुल 375.378 हेक्टेयर जमीन दी गई थी। इसमें 90.3260 हेक्टेयर पट्टा भूमि और 285.0524 हेक्टेयर अधिग्रहीत निजी भूमि शामिल थी।
हिमावत पावर प्राइवेट लिमिटेड को अमिलिया, सिहारी, कछगांव और चपरघटा गांवों में कुल 568.651 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध कराई गई थी। इसमें 217.813 हेक्टेयर पट्टा भूमि और 350.838 हेक्टेयर अधिग्रहीत निजी भूमि शामिल थी। दोनों कंपनियों को मिलाकर कुल 944.029 हेक्टेयर भूमि परियोजना के लिए उपलब्ध कराई गई थी।
अनुमति के बिना बैंकों में रखी जमीन
अनुबंध में स्पष्ट प्रावधान था कि राज्य सरकार की अनुमति के बिना कंपनियां आवंटित भूमि को न बेच सकती हैं, न लीज पर दे सकती हैं और न ही गिरवी रख सकती हैं। इसके बावजूद जांच में सामने आया कि हिमावत पावर ने भूमि को आईडीबीआई बैंक में बंधक रखा। वहीं लैन्को अनपरा पावर ने केनरा बैंक और पंजाब नेशनल बैंक में जमीन गिरवी रखी।
ऊर्जा विभाग के मुताबिक इस संबंध में कंपनियों ने शासन से अनुमति नहीं ली और न ही विभाग को कोई सूचना दी। सरकार ने इसे अनुबंध का गंभीर उल्लंघन मानते हुए कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की।
जवाब देने का मौका भी मिला, फिर भी चुप रहीं कंपनियां
शासन ने 25 मई 2026 को दोनों कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब मांगा था। नोटिस उनके पंजीकृत पते और ईमेल पर भेजा गया था, लेकिन समय सीमा समाप्त होने के बाद भी किसी कंपनी की ओर से जवाब या स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।
इसके बाद 25 अगस्त 2026 को अपर मुख्य सचिव डॉ. आशीष कुमार गोयल ने अंतिम आदेश जारी किया। राज्यपाल की अनुमति के बाद 944.029 हेक्टेयर भूमि को ऊर्जा विभाग में वापस निहित करने का निर्णय लिया गया। जिलाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि खतौनी में दोनों कंपनियों के नाम हटाकर पूरी भूमि उत्तर प्रदेश सरकार और ऊर्जा विभाग के नाम दर्ज कराने की नियमानुसार कार्रवाई तत्काल सुनिश्चित की जाए।
