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Wednesday, April 15, 2026

बोकारो लापता युवती केस: हाई कोर्ट की कड़ी फटकार, DGP से पूछा- ‘DNA टेस्ट में देरी क्यों?’

रांची | बोकारो की 18 वर्षीय युवती की गुमशुदगी और फिर जंगल से कंकाल मिलने के मामले में झारखंड उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य पुलिस और डीजीपी की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी जताई।

अदालत ने उठाए तीखे सवाल
सुनवाई के दौरान वर्चुअल रूप से मौजूद डीजीपी से कोर्ट ने पूछा कि बरामद कंकाल का अब तक DNA टेस्ट क्यों नहीं कराया गया? अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा “क्या पुलिस अदालत के आदेश का इंतजार कर रही है? कंकाल मिले कई दिन बीत चुके हैं। माता-पिता और कंकाल का सैंपल लेकर महज 3-4 घंटे में रिपोर्ट आ सकती थी, फिर इस मामले को लटकाया क्यों जा रहा है?”

CBI जांच की चेतावनी और अफसरों की तलब
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए डीजीपी, बोकारो एसपी, एफएसएल डायरेक्टर और एसआईटी टीम को गुरुवार को सभी दस्तावेजों के साथ व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि एसआईटी की जांच में लापरवाही पाई गई, तो केस को CBI को सौंप दिया जाएगा।

मामले का बैकग्राउंड
युवती 31 जुलाई 2025 से लापता थी। लापरवाही बरतने पर पिंडराजोड़ा थाना प्रभारी समेत 28 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका है। पुलिस ने आरोपित दिनेश महतो को गिरफ्तार किया है, जिसकी निशानदेही पर जंगल से कंकाल बरामद हुआ। लड़की की मां ने अपनी बेटी की तलाश के लिए हाई कोर्ट में हैबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका दायर की है।

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