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Saturday, August 22, 2026

छात्रों पर हमले को बाबूलाल मरांडी ने बताया निंदनीय

रांची। जेपीएससी-जेएसएससी सुधार मंच से जुड़े छात्रों द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन किए जाने के दौरान हुई झड़प को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने छात्रों पर हमले की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि रांची, गिरिडीह और हजारीबाग में अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ पुलिस की मौजूदगी में झामुमो कार्यकर्ताओं ने मारपीट की। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वाले युवाओं के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई बताया।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सरकार से छल और कथित वादाखिलाफी के बाद छात्रों में नाराजगी स्वाभाविक है, लेकिन इसके बावजूद छात्र शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि हजारीबाग के गांधी मैदान और गिरिडीह में छात्रों पर झामुमो कार्यकर्ताओं ने मास्क पहनकर लाठी से हमला किया, जबकि रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर भी छात्रों के साथ मारपीट की गई।

‘धोखे से छात्र आंदोलन खत्म करने की कोशिश’

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले धोखे और साजिश के जरिए छात्र आंदोलन को खत्म करने का प्रयास किया और अब आंदोलन कर रहे युवाओं के खिलाफ बल प्रयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब छात्र संगठित थे, तब सरकार उनके सामने आने से बचती रही, लेकिन अब अलग-अलग स्थानों पर छात्रों को निशाना बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान इस तरह की घटनाएं लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि छात्रों को अपनी बात रखने का अधिकार मिले और किसी भी पक्ष को कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाए।

झामुमो कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की मांग

बाबूलाल मरांडी ने पुलिस प्रशासन से कथित रूप से हमले में शामिल झामुमो कार्यकर्ताओं की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह राज्य में शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने के बजाय टकराव और अराजकता की स्थिति पैदा कर रही है।

उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि छात्रों के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई जारी रही तो युवाओं में सरकार के प्रति नाराजगी और बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ मारपीट किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है और ऐसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

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