33.2 C
Kolkata
Monday, June 15, 2026

बंगाल की सियासत में अचानक चर्चा में आई गुमनाम राजनीतिक पार्टी एनसीपीआई, शुभेंदु अधिकारी के साथ संगठन के चेहरे की तस्वीर वायरल

कोलकाता, 15 जून। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों ‘एनसीपीआई’ (नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया) का नाम अचानक तेजी से सुर्खियों में आया है। हालांकि राष्ट्रीय या राज्य स्तर की राजनीति में अब तक इस दल की कोई खास पहचान नहीं थी, लेकिन सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ असंतुष्ट और विद्रोही सांसदों के इस दल से जुड़ने की अटकलों ने इस छोटे से संगठन को अचानक बंगाल की सियासत के केंद्र में ला खड़ा किया है।

साल 2022 में हुआ था गठन

चुनाव आयोग (ECI) के नियमों के तहत एनसीपीआई ने वर्ष 2022 में अपने गठन की सार्वजनिक घोषणा की थी। 13 अक्टूबर 2022 को प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित विज्ञापनों के जरिए पार्टी ने अपने गठन, उद्देश्य और संगठनात्मक ढांचे की जानकारी सार्वजनिक की थी, ताकि तय समय सीमा (30 दिन) के भीतर यदि किसी को आपत्ति हो तो वह चुनाव आयोग में दर्ज करा सके।

हावड़ा में है पंजीकृत कार्यालय, पूर्वोत्तर में रही हैं गतिविधियां

सरकारी और आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार:

  • पंजीकृत कार्यालय: होल्डिंग नंबर 479, नटपाड़ा, बांकरा, जिला हावड़ा (पश्चिम बंगाल)।

  • राजनैतिक प्रभाव: अब तक इस पार्टी की गतिविधियां मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल के बजाय पूर्वोत्तर राज्यों त्रिपुरा और असम के जनजातीय इलाकों तक ही सीमित रही हैं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनावों में पार्टी ने कुछ सीटों पर अपने उम्मीदवार भी उतारे थे, हालांकि तब इन्हें कोई उल्लेखनीय सफलता नहीं मिली थी।

मोटिवेशनल स्पीकर उत्तिय कुंडू और शुभेंदु अधिकारी का कनेक्शन

हाल के दिनों में हावड़ा स्थित एनसीपीआई के कार्यालय को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हुई है। कार्यालय के प्रवेश द्वार पर उत्तिय कुंडू नामक व्यक्ति के बारे में विस्तृत जानकारी और तस्वीरें प्रदर्शित की गई हैं, जिन्हें स्थानीय स्तर पर संगठन का मुख्य चेहरा माना जा रहा है।

राजनीतिक हलकों में तब खलबली मच गई जब उत्तिय कुंडू की एक तस्वीर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ सामने आई। मूल रूप से मोटिवेशनल स्पीकर के तौर पर काम करने वाले उत्तिय कुंडू की पार्टी में वास्तविक भूमिका और पद को लेकर हालांकि अभी तक एनसीपीआई की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

टीएमसी के विद्रोही सांसदों का नया ठिकाना?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़े असंतोष और संगठनात्मक खींचतान के बीच असंतुष्ट सांसद एक सुरक्षित राजनीतिक मंच की तलाश में हैं। एनसीपीआई की अपेक्षाकृत छोटी संरचना और संगठनात्मक लचीलापन (Flexibility) इसके पीछे का एक बड़ा कारण हो सकता है। लोकसभा में अपनी अलग पहचान और अस्तित्व को बचाने की कोशिश कर रहे इन सांसदों के लिए यह गुमनाम दल एक नया और आसान ठिकाना साबित हो सकता है। यही वजह है कि बंगाल की मुख्यधारा की राजनीति में एनसीपीआई को लेकर कयासों का दौर बेहद गर्म है।

Related Articles

नवीनतम लेख